राजनीति

चुनाव के दौरान लोगों के बीच रोजगार ही सबसे बड़ा मुद्दा: सर्वे

इस सर्वे के मुताबिक 76 फीसदी लोगों ने ये माना कि नौकरियों की कमी सबसे बड़ी चुनौती है. इस दौरान कहा गया कि बीते समय के दौरान नौकरियों के मामले में बहुत कम सुधार हुआ है. […]

बम्बई हाइकोर्ट: सोशल मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापन को लेकर चुनाव आयोग को फटकार, कहा- आप भयभीत क्यों हैं?

बंबई हाई कोर्ट ने चुनाव से 48 घंटे पहले सोशल मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापनों का नियमन करने संबंधी कोई भी आदेश पारित नहीं करने पर चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है. […]

गैलरी

बरास्ता सोशल मीडिया

अखबारनामा

रवीश की समीक्षा: ये अखबार (दैनिक जागरण) तो भाजपा का परम सेवक है!

हिन्दी के अख़बार हिन्दी के पाठकों की हत्या कर रहे हैं। यह बात भाजपा समर्थकों के लिए भी लागू है और विरोधियों के लिए भी। वे भाजपा को चुनते हैं न कि अख़बार को। इसलिए मैंने कहा था कि आप ढाई महीने तक कोई न्यूज़ चैनल न देखें। मैंने इसके लिए अपवाद नहीं बताए थे बल्कि सभी चैनल न देखने की बात की थी। चैनलों पर चलने वाले प्रोमो पर न जाइये। देखिए देखिए करने के बाद भी आप न देखें। इसी तरह अख़बारों के बारे में सोचें। प्लीज़ आप अख़बार लेना बंद करें। आप पत्रकारिता को समाप्त करने के लिए अपने जेब से 300 रुपया कैसे दे सकते हैं? क्या आप भारत के लोकतंत्र और उसके पाठकों-दर्शकों की हत्या के लिए पैसे दे सकते हैं? […]

नज़रिया

सोशल मुद्दा: मोदी योगी हों या केजरीवाल लोक सभा चुनाव से पहले विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसा बहा रहे!

विज्ञापनों का खुला, नंगा, बेशर्म भ्रष्टाचार। यह हमारे पैसे से हमें ही बेवकूफ बनाने का नंगा खेल है। रोज अखबार देखकर गुस्सा आता है। रेडियो बंद कर देना पड़ता है। टीवी पर वही हाल है। हालांकि, देखता नहीं हूं इसलिए राहत है। दुख की बात यह है कि इन विज्ञापनों में फर्जी और बेमतलब की घोषणाएं होती है और घटिया प्रचार। […]