खतरे में आधार का डेटाबेस, 2500 रुपये का सॉफ्टवेयर कर सकता है हैक- रिपोर्ट

आधार डेटा सिक्योरिटी 2009 से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। फ्रेमवर्क तैयार होने के समय से ही आधार की सिक्योरिटी हॉट टॉपिक रहा है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) कह रहा है कि वह फेस रिकॉग्निशन तकनीक (चेहरा पहचानने) पर काम कर रहा है।

आधार को हर बार पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है लेकिन यह एक बार फिर से सुर्खियों में है। एक तीन महीने महीने तक चली इन्वेस्टिगेशन के बाद इसकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आधार का सॉफ्टवेयर हैक कर लिया गया है।

हफिंगटनपोस्ट डॉट कॉम ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि आधार कार्ड का सॉफ्टवेयर हैक हो चुका है। इसके हैक होने के साथ ही भारत के करीब एक अरब लोगों की निजी जानकारी दांव पर लगी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार कार्ड के सॉफ्टवेयर में एक गड़बड़ी है। इस गड़बड़ी को एक सॉफ्टवेयर के जरिए आधार डेटा हैक किया जा सकता है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति किसी के भी नाम से वास्तविक आधार कार्ड बना सकता है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक सॉफ्टवेयर है जो आधार के सिक्योरिटी फीचर को नाकाम कर देता है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति 12 डिजिट का वास्तविक आधार क्रिएट कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार की सुरक्षा में सेंध लगाने वाला यह सॉफ्टवेयर आसानी से उपलब्ध है।

इसके अलावा यह व्हाट्सएप पर सिर्फ 2500 रुपये में मिल रहा है और इसका जमकर इस्तेमाल हो रहा है। इसकी मदद से आधार के सिक्योरिटी फीचर को बंद कर नया आधार तैयार किया जा सकता है।