यूपी बोर्ड हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा 7 फरवरी से, 30 अप्रैल तक आएगा रिजल्ट

यूपी बोर्ड हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाएं 7 फरवरी से शुरू होंगी। हाईस्कूल की परीक्षाएं 14 और इंटर की 16 दिनों तक चलेंगी। हाईस्कूल की परीक्षाएं 7 से 28 फरवरी और इंटर की परीक्षाएं 7 से 2 मार्च तक होंगी। रिजल्ट 30 अप्रैल तक आएगा। सवा 3 घंटे का पेपर होगा। 8 बजे से परीक्षा शुरू होगी। हाईस्कूल में 36 विषयों में 1-1 पेपर होगा। एनसीआरटी में एक ही पेपर होता हैं। ये घोषणा उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने लखनऊ में की।

इस बार 57,87,998 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए हैं। 67,22,000 पिछली बार पंजीकरण करवाया था। इसकी जांच के बाद 66,39,268 पात्र परीक्षार्थी बचे थे।

यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा 14 और इंटर की 16 कार्यदिवसों में संपन्न होगी। चूंकि परीक्षा कुम्भ के दौरान पड़ रही है इसलिए टाइम टेबल बनाने में प्रमुख स्नानपर्वों का भी ध्यान रखा गया है। सात फरवरी के बाद 10 को बसन्त पंचमी और 19 फरवरी को माघी पूर्णिमा का स्नान है।

सीबीएसई के पैटर्न पर दो से एक पेपर
इस बार इंटर के 106 विषयों में से 39 मुख्य विषयों की परीक्षा में एक पेपर ही होंगे। बोर्ड ने सीबीएसई के पैटर्न पर दो से एक पेपर कर दिया है। बाकी विषय ट्रेड व कृषि विषय के हैं जिनमें एक से अधिक पेपर होते हैं लेकिन छात्रसंख्या अपेक्षाकृत काफी कम होने के कारण कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

मूल्यांकन
पहले या दूसरे सप्ताह में मूल्यांकन शुरू होकर 25 मार्च के आसपास तक चलेगा। इस साल परिणाम भी अप्रैल के पहले या दूसरे सप्ताह में घोषित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

57.87 लाख परीक्षार्थी पंजीकृत
2019 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए 5787998 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। हाईस्कूल में 3203041 और इंटरमीडिएट में 2584957 छात्र-छात्राएं हैं।

इस बार और सख्ती

उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने कहा है कि छह फरवरी से होने वाली यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में इस बार और सख्ती होगी। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए अभी से काम शुरू कर दिया है। इंतजामों पर नजर रखने के लिए कमेटी बना दी गई है।

रविवार को विकासभवन में मीडिया से रूबरू डिप्टी सीएम ने कहा कि इस बार परीक्षा कक्ष में दोनों ओर सीसीटीवी और वायस रिकार्डर लगेंगे। केंद्र से 200 मीटर की परिधि के अंदर प्रबंधक या प्रबंध समिति के लोगों को आने की अनुमति नहीं होगी। डीएम की अध्यक्षता में कमेटियां गठित कर दी गई हैं जो केंद्र निर्धारण के मानकों को पूरा कराएंगी। साथ ही देखेंगी कि केंद्र पर शौचालय, लाइट के लिए जेनरेटर या इनवर्टर पक्की चारदीवारी आदि अनिवार्य रूप से हैं या नहीं।

उप मुख्यमंत्री नेआंकड़ों के हवाले से कहा कि नकल पर शिकंजा कसने से छात्रों की संख्या कम हो गई। पिछले वर्ष 67.22 लाख छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था लेकिन सख्ती के कारण 11 लाख परीक्षार्थी परीक्षा छोड़कर भाग गए। पिछली बार 1.81 लाख प्राइवेट बच्चों के पंजीकरण हुए थे लेकिन, इस बार पारदर्शितापूर्ण पंजीकरण कराने पर यह संख्या 93 हजार पर रह गई। इस बार भी नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए और सख्ती की जाएगी।