राजिस्थान: चार साल में 20 हज़ार स्कूल बंद, 847 गर्ल्स स्कूलों पर भी ताले, नया कोई नही खुला।

…इधर बढ़े 1100 निजी स्कूल, इनमें जुड़ गए एक लाख बच्चे

गत तीन वर्ष के आंकड़ों की बात जाए तो सरकार इन वर्षों में करीब बीस हजार सरकारी विद्यालयों को मर्ज के नाम पर हमेशा हमेशा के लिए बंद कर चुकी है।

जयपुर। प्रदेश में सरकार एक बार फिर शून्य नामंकन वाले 238 विद्यालयों को मर्ज करने की तैयारी में है। वह भी एेसे में जब राज्य सरकार अपने चार वर्ष के कार्यकाल में करीब 22 लाख नए नामांकन प्रदेश भर के विद्यालयों में बढऩे की बात कह रहा है। लेकिन इन्हीं दावों के बीच एक हकीकत यह भी है कि गत तीन वर्ष के आंकड़ों की बात जाए तो यहीं सरकार इन वर्षों में करीब बीस हजार सरकारी विद्यालयों को मर्ज के नाम पर हमेशा हमेशा के लिए बंद कर चुकी है। इन विद्यालयों में नामांकन कम होने से इन्हें पास ही के सरकारी विद्यालयों में मर्ज कर बंद कर चुकी हैं।

सरकार का दावा सबसे बड़ा शिक्षा विभाग –

राज्य सरकार का दावा है कि 63 हजार विद्यालयों वाला शिक्षा विभाग प्रदेश का सबसे बड़ा विभाग है। शिक्षा विभाग के अनुसार चार वर्ष पहले सरकारी विद्यालयों में 60 लाख का नामांकन था। जो आज सरकारी विद्यालयों में 82 लाख के करीब पहुंच गया है। यानी पिछले चार सालों में नामांकन में 22 लाख की वृद्धि हुई है। लेकिन वहीं शिक्षाविदों की मानें तो उनका कहना है कि जब सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ा है तो सरकार को ओर स्कूल खोलने चाहिए। जबकि सरकार विद्यालयों को मर्ज के नाम पर बंद करने में लगी हैं।

नए शिक्षा सत्र से पहले राजस्थान में प्रारंभिक शिक्षा की यह डरावनी खबर है। भापा सरकार के मौजूदा कार्यकाल में चार शिक्षा सत्रों में लगभग 20 हज़ार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। खामियाजा हुआ लगभग 4 लाख बच्चे घट गए। सरकार के इस फैसले का फायदा मिला निजी स्कूलों को। इस दौरान 1122 निजी स्कूल बढ़ गए। इनमें बच्चों की तादाद भी एक लाख 11 हजार बढ़ गई। तीन सत्रों में राज्यभर में 847 सरकारी गर्ल्स स्कूलों पर भी ताले लटक गए।

प्राशि के स्टेट रिपोर्ट कार्ड ने ये गड़बड़ाए हालात उजागर किए हैं। कम नामांकन के चलते पिछले तीन सत्र से औसतन हर साल 5 हजार सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं। विभाग अपनी वाहवाही बनाए रखने के लिए इसे मर्जिंग, एकीकरण का नाम देता रहा है। खराब स्थिति इसलिए हैं कि लगातार सरकारी स्कूल बंद होने का सीधा फायदा निजी स्कूलों को मिल रहा है। पिछले पांच सत्रों में प्रदेश में 4948 निजी स्कूल बढ़ गए। इस दौरान साल दर साल निजी स्कूल छलांग लगाते रहे। 2013-14 में जहां निजी स्कूलों में बच्चों की संख्या 5749489 थी वो 16-17 में 1 लाख 11789 बढ़ते हुए 58 लाख 61278 तक पहुंच गई है। अगले तीन सत्रों के लिए विभाग ने नामांकन बढ़ाने के सालाना टारगेट तय कर दिए हैं।
इस बीच कम नामांकन वाले करीब ढाई हजार स्कूल दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करने की योजना पाइपलाइन में है।

ये चूक भारी पड़ रही सरकार को

{स्कूल बंद करने की बजाय संसाधन विकसित करते हुए नामांकन बढ़ाएं। हो रहा है इसके उल्टा।

{ प्रारंभिक ढांचा मजबूत करने की सबसे ज्यादा जरूरत, हो रहीं स्कूलें कम। फोकस माध्यमिक पर।

{ दूर-दराज पिछड़े इलाकों-ढाणियों में स्कूलों के फैलाव की जरूरत। हो रही हैं कम।

{ एकीकरण के पैरामीटर्स ठीक से तय नहीं हुए।

पांचवीं तक के 14297 स्कूलों ने अस्तित्व खोया

प्रदेशमें तीन शिक्षा सत्रों में सर्वाधिक 14297 अस्तित्व खोने वाले पांचवीं कक्षा तक के प्राथमिक स्कूल हैं। शेष उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। विभाग का तर्क रहा है कि राजनीतिक दबाव में बिना जरूरत के खोले गए स्कूल बंद अथवा मर्ज हुए हैं। इसका बड़ा असर राजकीय स्कूलों में घटता नामांकन और निजी स्कूलों में बच्चों की बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है। शिक्षाविदों के एक वर्ग का मानना है कि यह शिक्षा के निजीकरण को तेजी से बढ़ावा देने की दिशा में उठ रहा कदम है। यही हाल रहा तो भविष्य में प्रारंभिक सैटअप की स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाएगी।

हम संख्या नहीं, क्वालिटी पर फोकस कर रहे

^जरूरसे स्कूलों की संख्या कम हुई है। ज्यादातर वे स्कूल हैं जिनकी जरूरत नहीं थी। संख्या पर नहीं, हमारा ध्यान क्वालिटी पर है। सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहती है। -पी.सी.किशन, डायरेक्टर, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय

^सरकारी स्कूलों को साइडलाइन कर निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाने का षडयंत्र चल रहा है। इसके भारी दुष्परिणाम सामने आएंगे। -महेंद्रपांडे, महामंत्री, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ

^सरकारहर क्षेत्र की तरह शिक्षा में भी तेजी से निजीकरण की तरफ बढ़ रही है। स्कूलें बंद होती रहीं तो भविष्य में सरकारी प्रारंभिक सैटअप ही पूरी तरह उखड़ जाएगा। -नारायणसिंह,प्रदेश प्रवक्ता, राजस्थान शिक्षक पंचायतीराज कर्मचारी संघ

^सरकारभी अब व्यापारी की तरह फायदा-नुकसान सोचने लग गई है। होना यह चाहिए कि दूर ढाणी में दो बच्चे भी हैं तो सरकार उसकी शिक्षा का इंतजाम करे। -विजयसोनी, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ राधाकृष्णन

सरकारी को झटका, निजी स्कूलों को फायदा, तीन साल में ऐसे बिगड़ी प्राशि की तस्वीर

सरकारी हुए बंद तो ऐसे बढ़ रहे निजी स्कूल

सत्र राजकीय निजी गर्ल्स सरकारी

2013-1485685 33866 2023

2014-15 72200 34054 1527

2015-16 72915 35021 1406

2016-17 70391 34988 1176