यूपी शिक्षक भर्ती मामला: इलाहबाद हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद जांच कमेटी ने कापियों का मूल्याकन दोबारा कराने का फैसला लिया

उत्तर प्रदेश की 68500 शिक्षक भर्ती पूरी होकर भी अधूरी रह गई है। जितने अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट में चयनित हुए यानी कटऑफ के सहारे पास होकर सामने आए उन्हें नियुक्ति दे दी गई है। लेकिन, पूरी भर्ती प्रक्रिया धांधली व गड़बड़झाले का शिकार है, इसके ढेरों सबूत सामने आ चुके हैं। ऐसे में इस भर्ती का क्या होगा? यह यक्ष प्रश्न बन चुका है।

कल हुई सुनवाई के मद्देनजर जांच कमेटी सभी कॉपियों का दोबारा मूल्यांकन करने का निर्णय लिया है।

कापियों का पुनर्मूल्यांकन
उत्तर प्रदेश सरकार ने टीचर भर्ती प्रक्रिया में धांधली की जांच व गड़बड़ी के आरोप की पड़ताल के लिए जांच कमेटी बैठाई है। जिस तरह से कापियों में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं, ऐसे में कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन होना आवश्यक है। अब चूंकि सभी कॉपियों का पुनरमूल्यांक होना है ऐसे में बड़ी संख्या में चयनितों का बाहर होना तय माना जा रहा है। अब नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हालांकि अभी ऐसे अभ्यर्थियों के नाम सामने नहीं आए हैं जो अयोग्य हैं और उन्हें नियुक्ति मिली है। लेकिन, जिस तरह से स्कैन कॉपी में यह तथ्य सामने आए हैं कि किसी दूसरे की कॉपी किसी दूसरे के नाम हो गई है। ऐसे में अधिक नंबर पाकर चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या सामने आना तय है। सरकार अगर चाहेगी तो ऐसे चयनित अभ्यर्थियों को हटा सकेगी और शिकायत निस्तारित होने के बाद मेरिट लिस्ट में कटऑफ के तहत अंक पाने वाले अभ्यर्थियों का चयन कर सकेगी।