सेना के जवानों के साथ हुई बर्बरता पर मोदी सरकार की चुप्पी से झांक रहा है बीजेपी का दोमुंहापन

◆विनय कुमार

जम्‍मू के रामगढ़ सेक्‍टर में मंगलवार को बीएसएफ जवान नरेंद्र सिंह शहीद हो गए थे। पाकिस्‍तानी रेंजरों ने उनकी हत्‍या करने से पहले उन्‍हें कई यातनाएं दी थीं। खबरों के मुताबिक, जब नरेंद्र सिंह का शव मिला तो उनके गले और पैर पर कटे के निशान थे। उन्‍हें कई गोलियां मारी गई थीं।

पीएम मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान जिस अंदाज में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने का वादा किया था, उससे देशवासियों को लगने लगा था कि नरेन्द्र मोदी पीएम बनते ही देश में आतंकवादी घटनाओं पर लगाम लगा देंगे। खासकर जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान सीमापार से आतंकवाद फैलाने की हिमाकत तक नहीं कर सकेगा और पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लघंन पर रोक लगेगी। सीमा पर रोज मरते हमारे जवानों की जान की हिफाजत होगी। मोदी सरकार के 4 साल से ज्यादा होने को हैं और न तो आतंकवाद और न ही सीजफायर उल्लंघन में कोई कमी आ रही है।

ताजा मामला 18 सितंबर का है। 179 बीएसएफ की बटालियन में तैनात नरेंद्र सिंह बार्डर पर सुबह में अपने साथी जवानों के साथ सरकंडों की सफाई करने गए थे, ताकि झाड़ियों और सरकंडे का सहारा लेकर आतंकी घुसपैठ न कर सकें। इसी दौरान पाकिस्तान रेंजर्स ने सैन्य चौकियों को निशाना बनाते हुए फायरिंग कर दी थी। पाकिस्तान द्वारा की गई फायरिंग और बीएटी के हमले में नरेंद्र सिंह घायल हुए थे। इसके बाद वह अचानक गायब हो गए थे।

शाम को नरेंद्र सिंह का शव क्षत-विक्षत मिला था। उन्हें दो गोली लगी हुई थी और उनके शरीर के साथ बर्बरता की गई थी। शहीद नरेंद्र के परिवार के सदस्य ने बताया कि उनकी आंख भी फोड़ दी गई थी। उनके पैर और सीने में गोली लगी थी।

भारतीय सैनिकों के साथ पाकिस्तान की सेना की बर्बरता पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पूछा, “पहले हेमराज और अब नरेंद्र सिंह। पाकिस्तान ने बड़ी बर्बरता से उन्हें मार दिया। सरकार क्या कर रही है? मोदी जी क्या आपकी आत्मा आपको नहीं धिक्कारती?”

उन्होंने आगे कहा, “कहां गया 56 इंच का सीना और कहां गई लाल आंख? कहां गया एक के बदले 10 सिर लाने का वादा? सरकार जवानों को लेकर चिंतित नहीं। मोदी जी ने भारतीय सेना को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन उनकी सुरक्षा के बारे में कुछ नहीं सोचा। देश आपसे जवाब चाहता है और आपको जवाब देना पड़ेगा।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “पीएम मोदी जी जवाब दें कि आखिर कब तक भारत के सैनिकों पर अत्याचार जारी रहेगा? कब तक भारत पाकिस्तान के सामने बेबस रहेगा? आखिर क्या मजबूरियां हैं प्रधानमंत्री जी की?”

शहीद नरेंद्र सिंह के बेटे ने कहा, “अपने पिता की शहादत पर हमें गर्व है, लेकिन दो से तीन दिन के बाद क्या होगा? जब हमें कोई मदद नहीं मिलेगी। मेरे पिता देश की सेवा करते समय शहीद हो गए। मैं अधिकारियों से मांग करता हूं कि हमें वह सहायता प्रदान करें जो हमें चाहिए।”

इससे पहले भी मोदी सरकार में सैनिकों के साथ बर्बरता हो चुकी है

22 नवंबर 2016: जम्मू-कश्मीर में एलओसी के साथ सटे माछिल सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने घात लगाकर भारतीय जवानों पर हमला किया था। इस हमले में 57 आरआर के तीन जवान शहीद हो गए थे। जबकि दो घायल हुए थे। इसी दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा कायराना हरकत देखने को मिली थी। पाक सैनिक ने एक जवान का सिर काटकर अपने साथ ले गए थे। वह जवान राजस्थान के 25 वर्षीय प्रभु सिंह थे, बाकी दो उत्तर प्रदेश के के कुशवाह और शशांक के सिंह थे।

28 अक्टूबर 2016: जम्मू-कश्मीर में कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से फायरिंग में सेना का एक जवान शहीद हुआ था। इतना ही नहीं, आतंकियों ने मुठभेड़ में शहीद होने वाले जवान के शव के साथ बर्बरता भी की थी

1 मई, 2017: पुंछ जिले में पाक सेना बार्डर एक्शन टीम (बैट) परमजीत का सिर काटकर ले गई थी।

सत्ता में आने से पहले मोदी सरकार बीजेपी अपने चुनावी रैलियों में बॉर्डर पर सेना की सुरक्षा और पाकिस्तान को करारा जवाब देने की बात करते थे, लेकिन मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से सीजफायर का उलंघन और घुसपैठ की घटनाओं में कमी नहीं आई है। पिछले चार साल में देश के 280 जवान शहीद हो गए हैं।

साल 2014 से पहले पीएम मोदी अक्सर कहा करते थे कि पाकिस्तान को उसकी ही भाषा में करारा जवाब दें नहीं तो देश की जनता उन्हें भी कभी माफ नहीं करेगी। इसके अलावा बीजेपी के कई नेता यूपीए शासन में जवानों की मौत को लेकर सरकार पर लगातार हमले करते थे। साल 2009 में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चूड़ियां देने की बात कही थी। लेकिन आज मोदी सरकार के वे सारे मंत्री चुप्पी साधे हुए हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “पीएम मोदी जी जवाब दें कि आखिर कब तक भारत के सैनिकों पर अत्याचार जारी रहेगा? कब तक भारत पाकिस्तान के सामने बेबस रहेगा? आखिर क्या मजबूरियां हैं प्रधानमंत्री जी की?”

शहीद नरेंद्र सिंह के बेटे ने कहा, “अपने पिता की शहादत पर हमें गर्व है, लेकिन दो से तीन दिन के बाद क्या होगा? जब हमें कोई मदद नहीं मिलेगी। मेरे पिता देश की सेवा करते समय शहीद हो गए। मैं अधिकारियों से मांग करता हूं कि हमें वह सहायता प्रदान करें जो हमें चाहिए।”

इससे पहले भी मोदी सरकार में सैनिकों के साथ बर्बरता हो चुकी है

22 नवंबर 2016: जम्मू-कश्मीर में एलओसी के साथ सटे माछिल सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने घात लगाकर भारतीय जवानों पर हमला किया था। इस हमले में 57 आरआर के तीन जवान शहीद हो गए थे। जबकि दो घायल हुए थे। इसी दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा कायराना हरकत देखने को मिली थी। पाक सैनिक ने एक जवान का सिर काटकर अपने साथ ले गए थे। वह जवान राजस्थान के 25 वर्षीय प्रभु सिंह थे, बाकी दो उत्तर प्रदेश के के कुशवाह और शशांक के सिंह थे।

28 अक्टूबर 2016: जम्मू-कश्मीर में कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से फायरिंग में सेना का एक जवान शहीद हुआ था। इतना ही नहीं, आतंकियों ने मुठभेड़ में शहीद होने वाले जवान के शव के साथ बर्बरता भी की थी

1 मई, 2017: पुंछ जिले में पाक सेना बार्डर एक्शन टीम (बैट) परमजीत का सिर काटकर ले गई थी।

सत्ता में आने से पहले मोदी सरकार बीजेपी अपने चुनावी रैलियों में बॉर्डर पर सेना की सुरक्षा और पाकिस्तान को करारा जवाब देने की बात करते थे, लेकिन मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से सीजफायर का उलंघन और घुसपैठ की घटनाओं में कमी नहीं आई है। पिछले चार साल में देश के 280 जवान शहीद हो गए हैं।

साल 2014 से पहले पीएम मोदी अक्सर कहा करते थे कि पाकिस्तान को उसकी ही भाषा में करारा जवाब दें नहीं तो देश की जनता उन्हें भी कभी माफ नहीं करेगी। इसके अलावा बीजेपी के कई नेता यूपीए शासन में जवानों की मौत को लेकर सरकार पर लगातार हमले करते थे। साल 2009 में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चूड़ियां देने की बात कही थी। लेकिन आज मोदी सरकार के वे सारे मंत्री चुप्पी साधे हुए हैं।