ताज़ा खुलासा: नोटबंदी का जिन्न बाहर

छः नवंबर 2016 को मोदी जी ने अचानक उस बोतल का ढक्कन खोल दिया जिसमें बरसों से एक जिन्न कैद था- नोटबंदी का जिन्न ! ऐसी तबाही मची थी उसके बाद कि चार साल बाद भी भुगत रहा है देश उसके परिणाम। 150 लोगों ने जान गवांई, अनेकों काम-धंधे बंद हुए, काम करने वाले लाखों हाथों को बेरोजगारी का लकवा मार गया, खेतों में बुवाई रुक गई, कितने घरों में कई दिन तक एक समय का चूल्हा भी नहीं जल पाया ! खुला घूमता यह जिन्न आज भी कुछ न कुछ गुल खिलाता ही रहता है, बोतल में वापिस जाने का नाम ही नहीं लेता !

खैर अब तक तो एक तड़ीपार के सहकारी बैंक का नाम ही सामने आ रहा था लेकिन एक आरटीआर्इ से मिले जवाब से पता चला है कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं द्वारा चलाए जा रहे सहकारी बैंकों में खूब पैसे जमा हुए, बहती गंगा में सब के सब डुबकी लगा गए ! भाजपा तो डुबकी लगाने के मामले में सबसे आगे थी ही लेकिन शिवसेना, कांग्रेस, तृणमूल आदि तमाम पार्टियां भी पीछे कहां रहीं !!

आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर किस पार्टी के किस नेता के सहकारी बैंक में कितना रुपया जमा हुआ है। नाबार्ड की जानकारी के मुताबिक देश के 370 केंद्रीय सहकारी बैंकों (जिला) ने कुल 22,270 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले हैं। नोट बदलने का 18.82% काम तो दस बड़े जिला सहकारी बैंकों में ही हुआ है जिनमें से चार गुजरात, चार महाराष्ट्र, एक हिमाचल प्रदेश और एक कर्नाटक में है। चारों राज्यों की सरकार के नेता ही इन बैंकों के अध्यक्ष हैं।

सबसे ज्यादा पैसा जमा हुआ अहमदाबाद के जिला सहकारी बैंक में जहां 745.59 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले गए। इसके डायरेक्टर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और अध्यक्ष अजय भाई एच पटेल हैं।

• फेहरिस्त में दूसरा नंबर राजकोट जिला सहकारी बैंक का है जहां 693.19 करोड़ रुपए बदले गए और इसके अध्यक्ष हैं जयेश भाई राडियाडिया।

• तीसरे नंबर पर है पुणे का जिला केंद्रीय सहकारी बैंक जिसके अध्यक्ष पूर्व एनसीपी विधायक रमेश थोरात हैं। एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे इसके निदेशकों में शामिल हैं। यहां कुल 551.62 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले गए।

• कांगड़ा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक चौथे नंबर पर है जहां कुल 543.11 करोड़ कै नोट बदले गए हैं। बैंक के अध्यक्ष का कांग्रेसी नेता जगदीश सपेहिया।

• पांचवां नंबर है सूरत जिला सहकारी बैंक का जिसमें 369.85 करोड़ रुपए बदले गए और अध्यक्ष हैं भाजपा नेता नरेशभाई भिखाभाई पटेल।

• 328.5 करोड़ रुपए के साथ सबरकंठा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक का नंबर छठा है जिसके अध्यक्ष भाजपा नेता महेशभाई अमिचंदभाई पटेल हैं।

• सातवें नंबर पर है साउथ केनरा जिला सहकारी बैक जहां 327.81 करोड़ के नोट बदले गए। इसके अध्यक्ष हैं कांग्रेस नेता एमएन राजेंद्र कुमार।

• आठवें स्थान का सम्मान मिला है नासिक जिला केंद्रीय सहकारी बैक को जहां 319.68 करोड़ के नोट बदले गए। अध्यक्ष का नाम शिवसेना नेता नरेंद्र दारडे़।

• नौंवे नंबर पर सतारा का जिला केंद्रीय सहकारी बैक है, जिसमें 312.04 करोड़ के नौट बदले गए। इस बैंक के अध्यक्ष राकंपा नेता छत्रपति शिवेनद्र सिंह राजे अभय सिंह राजे भोसले हैं।

• दसवें नंबर पर संगली जिला सहकारी बैंक है, जहां 301.08 करोड़ के नोट बदले गए। इसके उपाध्यक्ष संग्राम सिहं समपत्रो देशमुख हैं, जो भाजपा नेता हैं।

नाबार्ड के रिकाॅर्ड के अनुसार अधिकांश जिला सहकारी बैंक राजनेताओं के अधीन होते हैं जो ज्यादातर सत्तारूढ़ दल से जुड़े होते हैं। तमिलनाडु की लिस्ट में सलेम जिला सहकारी बैंक में सबसे ज्यादा 162.37 करोड़ रुपये पुराने नोट्स बदले गए, जिसके अध्यक्ष एआईएडीएमके नेता आर एलंगोवन हैं।

वेस्ट बंगाल के नाडिया जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष टीएमसी नेता शिबनाथ चौधरी हैं , जहां पर 145.22 करोड़ रुपए बदले गए।

मध्यप्रदेश के खारगोन जिला सहकारी बैंक की कमान भाजपा नेता रंजीत सिंह दंडिर के पास है।

यूपी के मेरठ जिला सहकारी बैंक पर सपा नेता जयवीर सिंह का हाथ है जहां पर 94.72 करोड़ रुपए।

लिस्ट बहुत लंबी है। आशय केवल यह बताना है कि इस हमाम में सभी नंगे है क्योंकि सियासत इनके लिए एक पेशा है, धंधा है जो बहुत गंदा है और यह तब तक गंदा ही बना रहेगा जब तक जनता जागरूक नहीं होती और ‘इन कथित सेवकों’ को उनकी औकात नहीं बताती !

गुरुचरण की fb वाल से