बीजेपी विधयक पप्पू पर पुलिस का शिकंजा शिकंजा

बरेली : सुगबुगाहट पहले से थी लेकिन सही वक्त का इंतजार हो रहा था। प्रशासन त्योहारों के रहते रिस्क नहीं लेना चाहता था। जैसे ही मुश्किल हालात बीते भाजपा के बिथरी चैनपुर विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल पर कानून का शिकंजा कस दिया गया। वह भी कड़े तेवरों के साथ। मुकदमे में ऐसी धाराएं शामिल की गई हैं, जिनमें सात साल से ज्यादा सजा का प्रावधान है। हालांकि भाजपा की तरफ से भी कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है लेकिन मुकदमा वापस होगा, किसी भी अधिकारी ने ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया।

पहली बार जीतने के बाद जिस अंदाज में पप्पू भरतौल ने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया, उससे उनकी छवि तेज-तर्रार विधायक की बनती चली गई। चाहे सदर के तहसील दिवस में नायब तहसीलदार को हड़काने का मामला हो या फिर डीएम की बैठक में घुसकर पूर्व बीएसए पर गुस्सा उतारने का, विधायक अलग राह पर चलते दिखे। जब डूडा में पीओ की पीटे जाने की चर्चा फैली और इससे विधायक का नाम जोड़ा गया तो बड़े अफसरों में खलबली का अहसास दिखने लगा। सावन में कांवड़यात्रा के रूट को लेकर विधायक पप्पू भरतौल अड़े तो प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गईं। जैसे-तैसे अफसरों ने सावन को सकुशल गुजारा। उसके ठीक बाद मुहर्रम माह शुरू हो गया। रास्ते को लेकर टकराव से कानून व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना फिर से खड़ी हो गई। शुक्रवार को जब प्रशासन की ताजिये बगैर किसी व्यवधान के निकालने की प्लानिंग फेल हुई और कलारी से लेकर नकटिया तक बवाल मचा तो अफसरों के तेवर बदल गए। एसएसपी ने खजुरिया में जिस तरह डेढ़ दर्जन विधायक समर्थकों को पकड़ा और रास्ता नहीं खोलने पर पुलिस ने भीड़ पर लाठियां फटकारीं, तभी शनिवार को होने वाली कार्रवाई का आभास हो गया था। पुलिस ने रात गुजरते ही विधायक पर शिकंजा कस दिया। उनके समर्थकों के साथ बेटे विक्की भरतौल को भी लपेट लिया। पुलिस की इस कार्रवाई का भाजपा की तरफ से विरोध भी हुआ। कोर ग्रुप की बैठक करने के लिए आए भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल के साथ ज्यादातर विधायक, आंवला सांसद और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने नाराजगी जताई। आइजी से मिलकर अपनी बात रखी लेकिन पुलिस अपना कदम वापस लेगी, ऐसा उसके रवैये से लग नहीं रहा है। इसलिए क्योंकि एसएसपी ने खजुरिया गांव में विधायक के जिन समर्थकों को पकड़वाया था, उन्हें शनिवार को जेल भेज दिया गया।