कांवड़ और मुहर्रम मामला: बरेली में भी शुरू हुई साम्प्रदायिक राजनीति…

बिथरी चैनपुर विधान सभा क्षेत्र में आज़ादी से अब तक हमेशा सदभावना और सौहार्द रहा था। ये सौहार्द बरेली की मीडिया के साथ मिल कर बीजेपी विधायक ने खत्म किया। सबसे पहले कांवड़ निकलने को लेकर उमरिया गांव पर दबाव बनाया गया। इसी दबाव और हिन्दू मुस्लिम राजनीति के कारण दो पड़ोसी गांव लड़ा दिए गए। फिर कलारी गांव में भी इसी राजनीति का प्रयोग कर के गांव में साम्प्रदायिकता का ज़हर घोला गया।

मुहर्रम पर भी बीजेपी विधायक पप्पू भरतौल ने खजुरिया और अपने ऑफिस भरतौल में ताजिये रुकवा कर भड़काऊ भाषण दिया और पुलिस और ताजियेदरों को धमकाया। कुल मिलाकर समाज मे विद्वेष भर कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकी। दूसरी ओर पुलिस ने खजुरिया, उमरिया के लोगों की धरपकड़ की और सैकड़ों लोगों को जेल में डाल दिया।

बीजेपी विधायक पर पुलिस गंभीर धाराओं में मुकद्दमे तो लिखे लेकिन उनकी और उनके लोगों की गिरफ्तारी की हिम्मत पुलिस नही जुटा सकी। पुलिस का गुस्सा फूटा तो निर्दोषों पर। मुस्लिम बहुल गांवों में पुलिस ने डर का माहौल पैदा कर दिया है।

बीजेपी की साम्प्रदायिक राजनीति का शिकार हुई बरेली अगर जागरूकता और आपसी सौहार्द से काम नहीं लेगी तो ये व्यापक रूप ले लेगी। धुर्वीकरण की राजनीति के खिलाफ सभी दलो को मिलकर खड़े होना होगा।