सुप्रीम कोर्ट: आधार की अनिवार्यता और राष्ट्रीय महत्व के मामलों में अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग पर कल आएगा फैसला

आधार की अनिवार्यता को लेकर पांच जजों की संविधान पीठ ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। पांच जजों का संविधान पीठ तय करेगा कि आधार निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है या नहीं. मामले की सुप्रीम कोर्ट में 38 सुनवाई हुई. 17 जनवरी को आधार की सुनवाई शुरू हुई थी.
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अशोक भूषण की संविधान पीठ ने मामले की सुनवाई की थी। आधार पर फैसला आने तक सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के अलावा बाकी सभी केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं में आधार की अनिवार्यता पर रोक लगाई गई थी इनमें मोबाइल सिम व बैंक खाते भी शामिल हैं।कल इस मामले में फैसला सुनाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही का लाइव प्रसारण करने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करते हुए इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था कि लाइव प्रसारण का उनका मकसद खुली अदालत को बढ़ावा देना है।

इससे कोर्ट में भीड़ को भी कम किया जा सकता है। लाइव प्रसारण कानूनी शिक्षा के उद्देश्यों के लिए भी मददगार हो सकता है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल इसकी शुरुआत चीफ जस्टिस की कोर्ट से करने को कहा। सुनवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट में मौजूद एक वकील ने लाइव प्रसारण के सुझाव का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि इसका न्यायिक प्रशासन पर असर पड़ेगा और इससे फेक न्यूज को बढ़ावा मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पहले अदालती कार्यवाही के लाइव प्रसारण को वक्त की जरूरत बताया था। इस मामले में कल फैसला सुनाया जाएगा कि लाइव प्रसारण हो या न हो।