यूपी शिक्षक भर्ती मामला: सरकार को भर्ती परीक्षा घोटाले की जांच रिपोर्ट दाखिल न करने पर कोर्ट की फटकार

उत्तर प्रदेश में 68500 भर्ती परीक्षा में व्यापक स्तर पर धांधली उजागर हुई थी जिस के खिलाफ इलाहाबाद की लखनऊ खण्ड पीठ में आज सुनवाई हुई।

सोनिका देवी और अन्य मामले की सुनवाई आज जस्टिस इरशाद अली की एकल पीठ में हुयी । राज्य सरकार द्वारा अभी तक की गयी कार्यवाही जिसमे सचिव परीक्षा नियामक का निलंबन व् जाँच कमेटी का गठन से सम्बंधित शपथ पत्र दाखिल किया।

जबकि न्यायालय ने पिछली सुनवाई पर जाँच कमेटी द्वारा की गयी कार्यवाही की स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की गयी थी।

लेकिन सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिये समय मांगा।
कोर्ट ने सरकार को एक बार और समय देते हुए परसों केस को फिर से लगा दिया है। कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता को चेतावनी देते हुए फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट न आने की स्थिति में अगली डेट पर प्रमुख सचिव कोर्ट खुद उपस्थित हों।

सुनवाई के दौरान जांच कमेटी के गठन का भी मुद्दा उठा। जाँच कमेटी में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के शामिल होने पर कोर्ट ने तीखी आलोचना की ।

कोर्ट में भर्ती हो चुके 41556 और 6000 अवशेष के मुद्दे पर बहस हुई । जिस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा कोर्ट को बताया गया कि 41556 पदों के सापेक्ष 34000 की पहली लिस्ट जारी हुयी किन्तु आरक्षण नियमों का पालन किये बिना दूसरी लिस्ट जारी कर दी गयी जो अवैध है और दूसरी लिस्ट में चयनित लगभग 150 लोगों को हमने पार्टी भी बनाया है जिस पर कोर्ट ने कहा कि भर्ती 68500 की है न कि 41556 की। आरक्षण नियम कैसे लागू किये गए इस पर मामले पर अगली सुनवाई में कोर्ट में बहस होगी।