यूपी शिक्षक भर्ती घोटाला: हाईकोर्ट में सुनवाई आज

आज कोर्ट हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में 68500 शिक्षक भर्ती में धांधली, फर्जीवाड़ा, आरक्षण, 6 हज़ार गृह जनपद आदि मामले में सुनवाई होगी, सभी केस सोनिका देवी के याचिका के साथ बंच है।

क्या क्या हो चुका है
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार को तीन दिन का समय देते हुए कहा था कि सरकारी वकील हलफनामा दाखिल करके अपनी बात रखें। हलफनामे में अब तक सामने आई जांच की प्रगति बताएं और दोषी अधिकारियों और उन पर हुई कार्रवाई की भी जानकारी दें। यह भी बताएं कि अभ्यर्थियों को अंक किस प्रकार दिए गए, उत्तर पुस्तिकाओं की बार-कोडिंग किस प्रकार की गई।

न्यायमूर्ति इरशाद अली की एकल सदस्यीय पीठ आज सोनिका देवी की याचिका और अन्य दर्जनों मामलों पर आज सुनवाई करेगी पिछली सुनवाई उनके अवकाश पर होने के कारण नही हो सकी थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती में विशेष श्रेणी (दिव्यांग, सेनानी आश्रित, एक्स सविर्समैन) के आरक्षण पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा था। साथ ही कहा कि इस दौरान की गई नियुक्तियां याचिका के निर्णय पर निर्भर करेंगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने आशीष सिंह व अन्य की याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह को सुनकर दिया था। याचिका में कहा गया है कि 11 फरवरी 2011 की एनसीटीई की गाइडलाइन में कहा गया है कि अर्हता वाली परीक्षा में सरकार विशेष श्रेणी के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दे सकती है। इसी आधार पर टीईटी में विशेष श्रेणी को पांच फीसदी आरक्षण का लाभ दिया गया। 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती में विशेष श्रेणी के अभ्यर्थियों यह लाभ नहीं दिया जा रहा है जबकि यह भी अर्हता परीक्षा है।

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल कर उत्तरपुस्तिका बदलने संबंधी मामले की जांच में प्रगति व दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया है। उत्तरपुस्तिका बार कोडिंग पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। जिसपर आज सुनवाई होगी।

इस याचिका में याची ने सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में मिली उत्तरपुस्तिका की कार्बन कॉपी पेश करते हुए दावा किया था कि उसने एससी कटेगरी से आवेदन किया था। उसे 64 अंक मिलने चाहिए थे और वह इसके बावजूद उक्त परीक्षा में अनुतीर्ण कर दी गई, जबकि कुछ अभ्यर्थियों को 60 अंक मिलने के बावजूद उत्तीर्ण कर दिया गया। इस पर जब न्यायालय के आदेश पर परीक्षा नियंत्रक प्राधिकरण ने याची की उत्तरपुस्तिका कोर्ट के समक्ष पेश की तो पाया गया कि प्राधिकरण द्वारा पेश उत्तरपुस्तिका के पहले पृष्ठ पर अंकित बार कोड अंदर के पृष्ठों से मेल नहीं खा रहे हैं। न्यायालय ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि याची की उत्तरपुस्तिका बदल दी गई है। इस पर सरकार की ओर से आवश्यक जांच का आश्वासन दिया गया और साथ ही दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई।