आधार की संवैधानिक वैधता SC ने बरकरार रखी, बैंक खातों और मोबाइल से लिंक करने की अनिवार्यता खत्म

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली 5 सदस्यीय बेंच ने 10 मई को इस मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है. साथ ही सरकार से आधार के लिए मजबूत डाटा प्रोटेक्शन कानून लाने के लिए कहा है. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि CBSE, NEET, स्कूल में दाखिले के लिए आधार को अनिवार्य बनाने की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट की धारा 57 को रद्द कर दिया. प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकती हैं. आधार को बैंक और मोबाइल नंबर से लिंक करने की अनिर्वाता को भी सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया है.

आधार की अनिवार्यता को 31 याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई थी और इस पर करीब चार महीने तक बहस चली. आधार आम नागरिक की पहचान बन चुका है. देश में 122 करोड़ आधार कार्ड बने हैं.

फैसले को लेकर अपडेट्स…

आधार की संवैधानिक वैधता पर जस्टिस एके सिकरी ने अपने, चीफ जस्टिस और जस्टिस खानविलकर की ओर से फैसला पढ़ा. जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस ए भूषण अपने अपने-अपने विचार अलग-अलग लिखे हैं.

फैसला पढ़ते हुए जस्टिस एके सिकरी…

– आधार कार्ड और आइडेंटिटी के बीच फंडामेंटल अंतर है. एकबार बायोमीट्रिक जानकारी स्टोर हो गई तो वह सिस्टम में बनी रहगी.

– बेस्ट बनने से बेहतर है यूनिक बने रहना.

– आधार पर समाज में हाशिए पर पड़े व्यक्ति को सशक्त किया और उन्हें पहचान दी. आधार अन्य दूसरे आई प्रुफ से भी अलग है क्योंकि इसकी डुप्लीकेसी नहीं हो सकती है.

– आधार पर हमला संविधान के खिलाफ है. आधार एकदम सुरक्षित है.

सुनवाई के दिनों के हिसाब से देश का दूसरा सबसे लंबा मामला

10 मई को फैसला सुरक्षित होने के बाद अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बेंच को कहा था कि सुनवाई के दिनों के हिसाब से यह दूसरा सबसे लंबा मामला है. इस वक्त देश का सबसे लंबा मामला 1973 का केशवानंद भारती केस है.

क्यों उठा है विवाद?

बता दें कि सरकार ने सोशल वेलफेयर स्कीम्स कर लाभ उठाने के लिए आधार को अनिवार्य किया था. इसके अलावा बैंक अकाउंट खोलने, पैन कार्ड बनवाने, मोबाइल सिम, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस आदि बनवाने के लिए भी आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया था. सरकार का कहना है कि इससे लोग बिना किसी गड़बड़ी और जालसाजी के सरकारी स्कीम्स और अन्य सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं. बता दें कि आधार कार्ड को आईडी और एड्रेस प्रूफ के तौर पर मान्यता दी गई है. वहीं याचिकाकर्ता इसे नागरिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन मानते हैं.

आधार को चुनौती देने वाले प्रमुख नाम

31 याचिकाओं में एक याचिका हाईकोर्ट के पूर्व जज केएस पुत्तास्वामी की भी है. अन्य याचिकाकर्ताओं में मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता शांता सिन्हा, फेमिनिस्ट रिसर्चर कल्याणी सेन मेनन, सोशल एक्टिविस्ट्स अरुणा रॉय, निखिल डे, नचिकेत उडुपा और सीपीआई नेता बिनॉय विस्मन शामिल हैं. आधार के खिलाफ प्रमुख बहस इस बात को लेकर है कि यह स्कीम नौ जजों वाली बेंच के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें कहा गया है कि राइट टू प्राइवेसी यानी गोपनीयता का आधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है.

आधार के पक्ष में कौन-कौन?

आधार एक्ट, 2016 की वकालत करने वालों में केन्द्र सरकार, आधार जारी करने वाली अथॉरिटी UIDAI, महाराष्ट्र और गुजरात सरकार और रिजर्व बैंक हैं. कोर्ट में इनका प्रतिनिधित्व अटॉर्नी जनरल, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी और जयंत भूषण और वकील जोहेब हुसैन कर रहे हैं.

आदेश को हथियार बनाकर किया इस्तेमाल: कोर्ट

अभी तक हुई बहसों के दौरान केन्द्र ने मोबाइल सिम से आधार लिंकिंग पर अपने पक्ष को मजबूती से रखा है. सरकार का कहना है कि अगर मोबाइल यूजर्स का वेरिफिकेशन न किया गया तो सिम का गलत इरादों के लिए इस्तेमाल हो सकता है. हालांकि कोर्ट ने कहा था कि सरकार ने कोर्ट के आदेश का गलत अर्थ लगाया है और इसे आधार को अनिवार्य बनाने के लिए एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है.