इलाहाबाद हाईकोर्ट:अब दो दिन में मिल जाएगी जमानत, कोर्ट ने 10-दिन वाले नियम को घटाकर अब उसे दो दिन किया

अब उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को 10 दिनों तक जमानत के लिए इंतजार नहीं करना होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत के लिए 10-दिन वाले नियम को घटाकर अब उसे दो दिन कर दिया है।

पहले किसी सरकारी वकील को जमानत की अर्जी पर 10 दिन का अग्रिम नोटिस देना पड़ता था जिसके बाद ही जमानत की अर्जी पर सुनवाई होती थी। इसे अब घटाकर दो दिन कर दिया गया है। यह संसोधन इलाहाबाद हाईकोर्ट नियम, 1952 के नंबर 18 के उपनियम 3 में किया गया है।

इस नियम में कहा गया है : जमानत की अर्जी पर जमानत का आदेश तब तक नहीं दिया जा सकता जब तक की सरकारी वकील को कम से कम 10 दिन पहले इसका अग्रिम नोटिस नहीं दिया जाता है। जमानत की अर्जी देने और इस पर सुनवाई शुरू होने के बीच 10 दिन का अंतर होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में हाईकोर्ट को इस बारे में छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा था। इस बारे में याचिका सैयद मोहम्मद हैदर रिजवी ने दायर किया था जो पेशे से वकील हैं और एक दूरसंचार कंपनी के लिए काम करते हैं।


रिजवी के वकील तल्हा अब्दुल रहमान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट नियम, 1952 के नंबर 18 के उपनियम 3 को जीवन के अधिकार
और निजी स्वतन्त्रता के मौलिक सिद्धान्त के खिलाफ होने के कारण इसे गैर कानूनी करार देने का आग्रह किया था। इस नियम के साथ-साथ नियम 18(3) को संशोधित किया गया है। पहले यह कहा गया था कि अगर 10 दिन के नोटिस की अवधि के बीत जाने के दो दिनों के अंदर अगर जमानत के लिए आवेदन नहीं दिया जाता है तो आवेदनकर्ता को दो दिन का पूर्व नोटिस देना होगा।