सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर 800 साल से लगी रोक हटाई

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक सुप्रीम कोर्ट ने हटा दी है. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक संविधान की धारा 14 का उल्लंघन है.

सुप्रीम कोर्ट केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज अपना फैसला सुना सकता है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आठ दिनों तक सुनवाई करने के उपरांत 1 अगस्त को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसे आज 5 में से 4 जजो ने बहुमत से फैसला दिया।

केरल के इस मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश करने पर रोक लगी थी क्योंकि यही वह आयुवर्ग है जिस दौरान महिलाओं को पीरियड्स आते हैं.

लिंग आधारित समानता को मुद्दा बनाते हुए महिला वकीलों के एक समुदाय ने 2006 में कोर्ट में याचिका डाली थी. दरअसल, हिंदू धर्म में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को ‘अपवित्र’ माना जाता है और कई मंदिर इस कारण महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा देते हैं.

सबरीमाला मंदिर के अधिकारियों ने पहले दावा किया था कि वे इस परंपरा को इसलिए मानते हैं क्योंकि भगवान अयप्पा, जिनका यह मंदिर है, वो “अविवाहित” थे.

प्रतिबंध का समर्थन करने वाले भी तर्क देते हैं कि यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है. वे ये भी तर्क देते हैं कि श्रद्धालुओं को मंदिर में आने के लिए कम से कम 41 दिनों तक व्रत रखना ज़रूरी होता है और शारीरिक कारणों से वे महिलाएं ऐसा नहीं कर सकतीं, जिन्हें पीरियड्स आते हैं.