सबरीमाला मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाने वाली जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने दिया बड़ा बयान

सबरीमाला मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाने वाली जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने दिया बड़ा बयान

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रवेश की इजाजत दे दी गई है। इस मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस नरीमन, जस्टिस खानविलकर ने महिलाओं के पक्ष में एक मत से फैसला सुनाया। वहीं जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने सबरीमाला मंदिर के पक्ष में अपना फैसला दिया।

जस्टिस इंदु मल्होत्रा के द्वारा की गई टिप्पणी काफी अहम मानी जा रही है। उन्होंने फैसला पढ़ते हुए कहा कि वर्तमान निर्णय सिर्फ सबरीमाला तक ही सीमित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि गहरी धार्मिक भावनाओं पर आमतौर से अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि धार्मिक प्रथाओं को समानता के अधिकार (आर्टिकल 14) के साथ पूरी तरह परीक्षण नहीं किया जा सकता। पूजा का तरीका भक्त पर निर्भर करता है कि वह कैसे आराधना करता है। अदालत यह नहीं बता सकता कि किस तरह से पूजा किया जाना चाहिए।
आस्था से जुड़े मामले को समाज को ही तय करना चाहिए ना की कोर्ट को। उन्होंने कहा कि सबरीमाला श्राइन के पास आर्टिकल 25 के तहत अधिकार है, इसलिए कोर्ट इन मामलों में दखल नहीं दे सकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताएं भी बुनियादी अधिकारों का हिस्सा ही है।