पराक्रम पर्व: चुनाव से पहले सर्जिकल स्‍ट्राइक पर राजनीति से सेना के कई अफसर नाखुश!

28 और 29 सितंबर 2016 की दरमियानी रात पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकियों के 4 लॉन्चपैड्स को सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए तबाह कर दिया गया था।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकी ठिकानों पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी सालगिरह का जश्न केंद्र की मोदी सरकार बेहद धूमधाम से मनाने जा रही है। पूरे देश में तीन दिन का ‘पराक्रम पर्व’ मनाए जाने वाला है। राजनीतिक जानकार, बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इस कदम को आम चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, खबर है कि मोदी सरकार के इस फैसले से सेना के कई अफसर नाखुश हैं।

द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक, सेना के कई अधिकारियों को सर्जिकल स्ट्राइक के ‘लगातार राजनीतिकरण’ को लेकर ‘कोफ्त’ हो रही है। उनका मानना है कि गुपचुप अंजाम दिए जाने वाले सैन्य मिशनों का राजनीतिक फायदे के लिए बेवजह प्रचार नहीं किया जाना चाहिए। एक वरिष्ठ अफसर ने कहा, ‘सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो क्लिप लीक कर दिए गए। टीम के कुछ सदस्य टीवी चैनलों पर नजर आए, भले ही उनके चेहरे छिपा लिए गए हों। गुपचुप अंजाम दिए गए अभियानों को गुप्त ही बनाए रखा जाना चाहिए।’
BJP 29 को मनाएगी सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ
2019 के लोकसभा चुनाव तक सरकार सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह हों या अन्य मंत्री अपने भाषणों में सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते रहते हैं.

एक अन्य अफसर ने कहा, ‘पिछले साल कोई पराक्रम पर्व नहीं मनाया गया। इस साल रक्षा मंत्रालय ने अचानक से सेना को आदेश दिया कि वे बड़े पैमाने पर इसकी सालगिरह मनाएं…51 शहरों में।’

देशभर के कॉलेजों को UGC का आदेश: 29 सितंबर को मनाएं ‘सर्जिकल स्ट्राइक डे’

यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देशभर की यूनिवर्सिटीज को ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ मनाने का आदेश दिया है। गुरुवार को जारी आदेश में 29 सितंबर को ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ मनाने की बात कही गई है।

बता दें कि 28 और 29 सितंबर 2016 की दरमियानी रात पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकियों के 4 लॉन्चपैड्स को सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए तबाह कर दिया गया था। अधिकारियों का मानना है कि यह ऑपरेशन बड़े स्तर पर हुआ था। हालांकि, सीमा पर पहले भी यूपीए के वक्त में ऐसे छोटे-छोटे ऑपरेशन अंजाम दिए जाते रहे। हालांकि, एनडीए सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक को जनता के बीच जाकर स्वीकारा।