मोहन भागवत के बयानो से भ्रमित हैं संघ कार्यकर्ता

आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के स्वयंसेवकों का भ्रम काफी बढ़ गया है। आरएसएस का मुख्यालय नागपुर में है। वहां भी लगने वाली शाखा में सरसंघचालक मोहन भागवत के बयान की चर्चा की है। चर्चा के दौरान स्वयंसेवकों का भ्रम सामने आ रहा है। संघ से जुड़े एक अखबार के वरिष्ठ पत्रकार छुट्टी बिताकर लौटे हैं और उनका कहना है कि वह खुद बचपन से शाखा में जाते रहे हैं। नागपुर के हजारों स्वयंसेवकों की तरह वह भी भ्रमित हैं।

सूत्र का कहना है कि संघ का अनुशासित संगठन है। इसलिए सरसंघचालक के वक्तव्य की अवमानना नहीं की जा सकती। यह संघ के हर संघटक की पहली और आखिरी शर्त है, लेकिन भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। इलाहाबाद के संघ के एक पुराने कार्यकर्ता का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी इंदौर में मस्जिद में गए। संघ प्रमुख ने हिन्दू राष्ट्र और हिन्दुत्व की नई व्याख्या कर दी है। मुसलमान को जोड़ने का संदेश दे रहे हैं, लेकिन यह हो नहीं पाएगा। सूत्र का कहना है कि इसी आधार पर आरएसएस और भाजपा कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाता था, लेकिन अब हम इसका क्या जवाब देंगे?

विश्वहिन्दू परिषद के पूर्व महासचिव और अंतरराष्ट्रीय विश्वहिन्दू परिषद के संस्थापक प्रवीण भाई तोगड़िया ने भी सरसंघचालक द्वारा गुरू गोलवरकर की किताब बंच ऑफ थॉट को खारिज करके केरल के श्रीरंगा हरि की पुस्तक को अहम बताने को खतरनाक बताया है। तोगड़िया का कहना है कि वह शाखा में ट्रेनिंग देने, प्रतिज्ञा दिलाने वाले लोगों में रहे हैं और उनके विचार में सरसंघचालक ने संपूर्ण आरएसएस की विचारधारा को छोड़ दिया है।

तोगड़िया का कहना है कि उन्होंने पहले संघ के प्रचारक से पूछा था कि आरएसएस में हिन्दू के साथ मुसलमान, क्रिश्चियन को क्यों जगह नहीं दी जा सकती तो इसके जवाब में कहा जाता था कि क्या गर्ल्स स्कूल में ब्वॉयज को पढ़ाई के लिए प्रवेश दिया जा सकता है? तोगड़िया ने कहा कि उनके पास भी विज्ञान भवन में सरसंघचालक का व्याख्यान समाप्त होने के बाद से लगातार फोन आते हैं।