जनकपुर से अयोध्या: मोदी ने जिस बस को झंडी दिखाई, वह दोबारा चली ही नहीं

ये तस्वीर 11 मई की है। बस को हरी झंडी दिखाकर जनकपुर से अयोध्या रवाना करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली।

दैनिक भास्कर की ओर की गई पड़ताल में खुलासा कि दोनों देशाें के अफसर 11 मई को ही जानते थे कि इन बसों को आज के बाद नहीं चलना
दोनों में से एक बस तो दूसरे रूट पर चलने लगी

11 मई 2018 को नेपाल के जनकपुर से अयोध्या और अयोध्या से जनकपुर बस सेवा की शुरुआत की गई। लेकिन ये सेवा लाखों तीर्थयात्रियों के साथ छल साबित हुई है। उद्घाटन के एक महीने बाद से इन बसों के नियमित चलने के दावे झूठे निकले। भास्कर पड़ताल में यह भी खुलासा हुआ है कि दोनों देशाें के अफसर 11 मई को ही जानते थे कि इन बसों को आज के बाद नहीं चलना है। इसके बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली से बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करा दिया।

पड़ताल में यह भी पता चला कि तब बस में यात्री दिखाने के लिए आनन-फानन में जान-पहचान वालों को ही यात्रा करा दी गई थी। भास्कर टीम ने एक-दो यात्रियों से बात की तो वे बोले कि- हमें 9-10 मई 2018 को फोन आया था कि अयोध्या जाना है। वहां रहने-खाने की सुविधा फ्री है। इसलिए हम भी चले गए।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक- काठमांडू में खड़ी हैं दोनों बसें : यही नहीं, इन बसों को चलाने के लिए दोनों देशों के बीच जरूरी करार (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) भी रिन्यू नहीं हुआ है। ये सब कुछ जानते हुए भी बसें चलवा दी गईं। उस वक्त इन अफसरों ने अपनी चालबाजी को छिपाने के लिए यह बयान दिया था कि एक महीने बाद ये बसें नियमित रूप से दौड़ेंगी। अब यह दोनों बसें काठमांडू में खड़ी हैं। बस मालिक दीपक थापा ने इस आश्वासन में अपने गैरेज में बस खड़ी रखी है कि उसे इस रूट पर चलाया जाएगा। वहीं, अयोध्या से जनकपुर के लिए चली बस गंगोत्री ट्रैवल्स की थी, जो अब अपने पुराने रूट पर चल रही है।

बस चलाने के लिए जरूरी करार अब तक नहीं हुआ : नेपाल के जनकपुर उपमहानगर पालिका के नगर प्रमुख लाल किशोर साह ने बताया कि दोनों देशों के राजनेता और अधिकारी जानते थे कि ये बस सेवा चलने वाली नहीं है। जिस एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) के तहत बस सेवा को संचालित करना है। वह करार अब तक हुआ ही नहीं है। पूर्व में अयोध्या और जनकपुर धाम के मेयर के बीच 2014 में करार हुआ था। लेकिन, 2017 में ही वह समाप्त हो चुका है। नए करार की प्रक्रिया अभी चल ही रही है। एमओयू अभी तक रिन्यू नहीं हो सका है।

उद्घाटन वाली बस में नेता और अफसरों के रिश्तेदार बने थे यात्री : जनकपुर उपमहानगर पालिका की डिप्टी मेयर रीता झा ने कहा- मैं भी जनकपुर से अयोध्या यात्रा पर गई थी। नेपाल सरकार की ओर से जारी यात्रियों की सूची में सभी किसी न किसी राजनेता और अधिकारियों के परिजन थे। मुझे इसकी जानकारी नहीं थी, पर यात्रा के दौरान जब आपस में बातचीत शुरू हुई तो जानकारी मिली की सभी किसी न किसी के संबंधी या परिजन हैं। सबको एक-दो दिन पहले जाने की सूचना मिली थी।