हिंदू महासभा ने जारी किया देश का पहला हिंदू संविधान, हिंदू अदालत में होगा हिंदुओ के लिये न्याय

अखिल भारत हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव व हिंदू न्यायपीठ की स्वयंभू पहली न्यायाधीश डॉ. पूजा शकुन पांडेय ने मंगलवार को न्यायपीठ का संविधान सार्वजनिक कर दिया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक नौरंगाबाद के महासभा कार्यालय पर मीडिया को संविधान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान भारतीय संविधान के खिलाफ नहीं है, जबकि शरिया कानून सीधे संविधान का विरोध करता है। हम संविधान के माध्यम से हिंदुओं के मामले निस्तारित करेंगे। पूरी कोशिश होगी कि मामले को आपसी बातचीत से निस्तारित किया जाए। डॉ. पूजा ने कहा कि गांधी जयंती पर 2 अक्टूबर को हम धिक्कार दिवस के रूप में मनाते हैं, इसलिये हमने इस संविधान को लागू किया है। गांधी ने देश को तोडऩे का काम किया है, उन्हें कभी सम्मान नहीं दे सकते।

अखिल भारत हिंदू महासभा की न्यायपीठ पर हाईकोर्ट सवाल खड़े कर चुकी है। प्रदेश सरकार को नोटिस भेजा है और मामले पर जबाब तलब किया है। महासभा ने 15 अगस्त को मेरठ में हिंदू न्यायपीठ की स्थापना की थी. गुजरात के द्वारिका में मुरली आश्रम की महन्त मां पूजानन्द गिरि उर्फ डॉ0 पूजा शकुन पांडेय को इस न्यायपीठ का पहला चीफ जस्टिस बनाया गया है.

खाप पंचायतों की तरह मौत की सजा का प्रावधान
हिंदू न्यायपीठ में केवल हिंदुओं की फरियादों की ही सुनवाई होगी. गांव-मुहल्लों के झगड़ों से लेकर घरेलू मामले तक निपटाये जायेंगे. यह पूछने पर कि सजा का प्रावधान कैसे रहेगा, न्यायपीठ की जज डॉ0 पूजा शकुन पांडेय ने बताया कि पहले बातचीत और आर्थिक जुर्माना से मामलों का हल निकाला जायेगा और अगर बात नही बनती तो मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है. यह पूछे जाने पर कि सजा तय होने के बाद मृत्युदंड कैसे दिया जायेगा, डॉ0 पूजा शकुन पांडेय ने बताया कि जैसे गोडसे ने बंदूक उठाई थी, वैसे ही महासभा के पदाधिकारी सजा देगें.

यह भी कहा था
अगस्त माह में मेरठ में त्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा था कि सभी जानते हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने राज-धर्म का पालन करने के लिए सीता को निष्कासित कर दिया था। ङ्क्षहदू न्यायपीठ में भी निष्पक्षता का वैसा ही भाव होगा। सनातन धर्म की पुस्तकों यथा-नारद स्मृति के 2000 श्लोक, मनुस्मृति, स्मृति चंद्रिका, सरस्वती विलास जैसे ग्रंथों में न्याय और दंड विधान का गहराई से प्रतिपादन किया गया है। उसे ही आधार मानकर नियमावली (बायलाज) तैयार की जा रही है। इसका भारतीय संविधान से कोई टकराव नहीं होगा। उन्होंने कहा लव जिहाद और धर्मातरण कर हिंदू धर्म को समाप्त करने की साजिश चल रही है। इससे संबधित मामले प्राथमिकता के आधार पर हिंदू न्याय पीठ में सुने जाएंगे।