रुपये की गिरावट का असर: पूंजी जुटाने के लिए डॉलर कर्ज लेंगी भारतीय तेल कंपनियां

रुपया 43 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ अपने रेकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। गुरुवार को 73.77 रुपये पर कारोबार कर रहे रुपये के लगातार गोता लगाने के चलते अब रिजर्व बैंक भी सुधार के विकल्पों पर विचार करने लगा है। नवभारत की खबर के अनुसार आरबीआई ने अब तेल कंपनियों को अपने वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए फॉरेन करंसी लोन लेने की अनुमति दे दी है। केंद्रीय बैंक ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब अनुमान लगाया जा रहा था कि वह सीधे तेल कंपनियों को डॉलर बेचेगा, लेकिन इससे उसका खजाना कमजोर पड़ता।

ऐसे में रिजर्व बैंक ने तेल कंपनियों को ही उधार लेने की अनुमति दे दी ताकि उसके पास फॉरेन रिजर्व बना रह सके। कच्चे तेल के 85 डॉलर प्रति बैरल तक के स्तर तक पहुंचने के बाद रुपये में गिरावट और तेज हो गई थी। अब तक रुपये के मुकाबले डॉलर की कीमत में 10 रुपये तक का इजाफा हुआ है, इससे पहले 2013 में 15 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।
रुपये को संभालने के लिए अब आरबीआई की मौद्रिक नीति कमिटी के फैसलों पर नजर है, जिसकी शुक्रवार को बैठक होगी। केयर रेटिंग्स में चीफ इकॉनमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा, ‘रुपये की गिरावट के चलते आयातित सामानों में महंगाई का असर देखने को मिलेगा।’