यूपी शिक्षक भर्ती: सरकार की पासिंग मार्क्स कम करने में रुचि नहीं, हाईकोर्ट ने मामला एकल पीठ को जल्द सुनवाई के लिए भेजा

68500 भर्ती मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सरकार द्वारा निर्धारित 30- 33% पासिंग मार्क्स को पूर्व मद निर्धारित 40-45% करने का आदेश किया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को बिना हीलाहवाली और जवाब दाखिल किए इसे मान लिया और परीक्षा परिणाम 40-45% पर जारी किया।

सरकार की इस कारगुज़ारी के खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट डबल बेंच में अपील दाखिल की। कोर्ट ने अभ्यर्थियों के तर्कों से सहमति जताते हुए राज्य सरकार से पूछा कि यदि सरकार पासिंग मार्क्स कम करना चाहती हो तो अपना हलफनामा दाखिल करे। 27 और 28 अगस्त को कोर्ट ने सरकार जवाब दाखिल करने को कहा लेकिन सरकार की ओर से व्यक्तिगत रूप से आये अपर सचिव ने कोर्ट के सामने इस संबंध अनभिज्ञता जताई। अंततः कोर्ट ने सरकार को पासिंग मार्क्स कम करने के पक्ष में हलफनामा दाखिल करने का समय दिया। इस बीच अभ्यर्थी लगातार धरना प्रदर्शन भी करते रहे। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी सरकार ने 27 सितम्बर तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया।

कोर्ट ने लगातार दाखिल हो रही याचिकाओं को देखते हुए 45% पासिंग मार्क्स का अंतरिम आदेश करने वाली एकल पीठ को निर्देश करते हुए मामला निस्तारित कर दिया। डबल बेंच ने एकल पीठ को जल्द सुनवाई के निर्देश दिया है क्योंकि इससे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी दूर होगी और बड़ी संख्या में प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी।

क्या है मामला

अभ्यर्थियों का तर्क है कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया के विज्ञापन में तो न्यूनतम अहर्ता 40 से 45% थी लेकिन बाद में सरकार ने इसे घटाकर 30 से 33% किए जाने का घोषणा की पर जब जिसे ध्यान में रखकर सभी अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी लेकिन जब परीक्षा परिणाम घोषित किया गया तो परिणाम 40 से 45% अहर्ता के आधार पर जारी किया गया जिसके चलते कई अभ्यर्थी परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो सके। 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में से 28000 पद खाली रह गए ।

यूपी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया के विज्ञापन में तो न्यूनतम अहर्ता 40 से 45% थी लेकिन बाद में सरकार ने इसे घटाकर 30 से 33% किए जाने का घोषणा की पर जब जिसे ध्यान में रखकर सभी अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी लेकिन जब परीक्षा परिणाम घोषित किया गया तो परिणाम 40 से 45% अहर्ता के आधार पर जारी किया गया था।