जम्मू कश्मीर: निकाय चुनाव में ईवीएम एम1 पर उठे सवाल

जागरण की खबर के मुताबिक जम्मू राज्य में होने जा रहे निकाय चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन एम3 के बजाय एम1 का उपयोग होने जा रहा है। एम1 वो मशीनें हैं, जिन्हें भारतीय चुनाव आयोग मतदान से बाहर किया हुआ है।

कहीं इससे किसी पार्टी विशेष को फायदा देने का इरादा तो नहीं? ऐसा क्यों है कि जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2014 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान ईवीएम एम2 का उपयोग किया गया और एम3 की ओर बढ़ने के बजाय आयोग बाहर की जा चुकी मशीनों का इस्तेमाल करने जा रहा है।

एडवोकेट संजीव कुमार सरीन ने चुनाव आयोग पर अंगुली उठाते हुए शुक्रवार को कहा कि पहली बार निकाय चुनाव ईवीएम से होने जा रहे हैं। इससे पहले निकाय व पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से हुआ करते थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003, 2004, 2005 और 2006 में बनी ईवीएम को एम1 कहा जाता है। वर्ष 2006 से 2013 तक बनी ईवीएम को एम2 और इसके बाद बनी मशीनों को एम3 कहा जाता है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर चुनावों में एम3 ईवीएम का उपयोग होने लगा है। उन्होंने कहा कि वास्तव में ईवीएम एम1 को चुनाव आयोग बाहर करते हुए इन्हें नष्ट करने के निर्देश दे चुका है क्योंकि यह वोटर वेरिफिकेशन पेपर आडिट ट्रायल के साथ नहीं बनीं। अदालत के आदेशानुसार यह जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ऐसा क्या हुआ कि वर्ष 2014 में एम2 से चुनाव करवाने के बाद अब फिर एम1 से चुनाव करवाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर चुनाव आयोग ही यह बता सकता है कि आखिर क्यों एम3 के बजाय पीछे जाते हुए एम1 का इस्तेमाल करने जा रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में एडवोकेट सचिन डोगरा व दीपाली कपूर के माध्यम से हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की है। जिस पर आज शुक्रवार को सुनवाई भी हुई। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव को नोटिस भी जारी किया है। उन्होंने कहा कि मतदाता जागरूक हों, इसलिए इस मसले को सार्वजनिक किया जा रहा है।