सुप्रीम कोर्ट ने सीमेंट फर्मों पर 6300 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के आदेश के तहत सीमेंट कंपनियों पर लगाए गए 6,300 करोड़ रुपये की जुर्माने की राशि को बरकरार रखा, साथ ही कंपनियों से केवल 10% राशि जमा करने को लेकर सवाल भी किया।

इन्हें एकजुट होकर कीमतें बढ़ाने (कार्टेलाइजेशन) का दोषी ठहराया गया। सीसीआई ने पाया कि इन कंपनियों ने सीएमए की मदद से सीमेंट के रेट, उपयोग क्षमता और उत्पादन समेत दूसरी जानकारियां शेयर कीं। इसके बाद उत्पादन और सप्लाई कम कर दी।

किस कंपनी पर कितनी पेनल्टी ?

कंपनी जुर्माना (रुपए)
जयप्रकाश एसोसिएट्स 1,323.60 करोड़
अल्ट्राटेक सीमेंट 1,175.49 करोड़
अंबुजा सीमेंट 1,163.91 करोड़
एसीसी 1,147.59 करोड़
लाफार्ज इंडिया 490.01 करोड़
सेंचुरी टेक्सटाइल 274.02 करोड़
रामको सीमेंट 258.63 करोड़
इंडिया सीमेंट 187.48 करोड़
बिनानी सीमेंट 167.32 करोड़
जे के सीमेंट 128.54 करोड़
कार्टेलाइजेशन से सरकार भी परेशान : पिछले गुरुवार को सरकार ने संकेत दिए कि कंपनियां कार्टेलाइजेशन बंद नहीं करेंगी तो सीमेंट को जरूरी कमोडिटी में शामिल किया जा सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में कहा, सीमेंट कंपनियों की साठगांठ की वजह से देश में कंक्रीट की सड़कें बनाने में दिक्कतें आ रही हैं। देश के कुल सीमेंट उत्पादन का 40% सड़कों के लिए इस्तेमाल होता है।

जानकारी के मुताबिक उत्पाद संघ में शामिल होने को लेकर अगस्त 2016 में सीसीआई ने अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, एसीसी लिमिटेड, अंबुजा सीमेंट लिमिटेड, रैमको सीमेंट्स लिमिटेड और जेके सीमेंट लिमिटेड के साथ-साथ इंडस्ट्री बॉडी सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएमए) सहित 11 सीमेंट कंपनियों पर 6,300 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया था। जिसे सीमेंट निर्माताओं ने अपीलीय निकाय के समक्ष चुनौती दी थी, जिसने सीसीआई से एक नया आदेश जारी करने के लिए कहा था।

अगस्त 2016 के आदेश में सीसीआई ने सीएमए को दंडित करने के अलावा सभी फर्मों को बाजार में सीमेंट की कीमतें, उत्पादन और आपूर्ति पर समझौते के लिए निर्देश दिया था।

इसके बाद सीमेंट निर्माताओं की ओर से सीसीआई के आदेश को नेशनल कंपनी लॉ अपीलीट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में चुनौती दी गई, हालांकि एनसीएलएटी ने 25 जुलाई को सीसीआई के आदेश को बरकरार रखा। सीसीआई ने आदित्य बिड़ला समूह फर्म अल्ट्राटेक पर 1,175.49 करोड़ रुपये का उच्चतम जुर्माना लगाया था।