दागी उम्मीदवारों के लिए विज्ञापन का प्रारूप तैयार, चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय से मंजूरी मांगी

संसद और विधानसभाओं में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले दागी उम्मीदवारों पर दर्ज मामलों की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए प्रकाशित होने वाले विज्ञापन का प्रारूप तैयार कर लिया गया है
संसद और विधानसभाओं में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले दागी उम्मीदवारों पर दर्ज मामलों की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए प्रकाशित होने वाले विज्ञापन का प्रारूप तैयार कर लिया गया है. इस संबंध में चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को जानकारी दे दी है. चुनाव आयोग ने कहा है कि कानून मंत्रालय उसकी जांच कर मंजूरी प्रदान करे. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंशा जताई थी कि चुनाव लड़ने वाले आपराधिक छवि के उम्मीदवारों के बारे में अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बार-बार विज्ञापन प्रकाशित हो, ताकि जनता को उनके बारे में जानकारी मिल सके. खबरों के अनुसार विधि मंत्री का विधायी विभाग विज्ञापन के प्रारूप की जांच करेगा.

जैसी कि खबर है, चुनाव आयोग चाहता है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में चुनाव पूर्व दागी उम्मीदवारों के विज्ञापन के प्रारूप को मंजूरी दे दी जाये. बता दें कि विधि विभाग द्वारा मंजूरी प्रदान किये जाने के बाद इसके इस्तेमाल के लिए अधिसूचना जारी कर दी जायेगी.

देश में ऐसा कोई भी राजनीतिक दल नहीं, जिसमें दागी नेता न हों

देश में ऐसा कोई भी राजनीतिक दल नहीं है, जिसमें दागी नेता न हों. हालांकि राजनीति में अपराधीकरण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दागी सांसदों, विधायकों को अयोग्य ठहराने से इनकार कर दिया था, मगर स्पष्ट रूप से कहा था कि अब संसद में कानून बनाना जरूरी है. इस मामले पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि समय आ गया है कि संसद कानून लाये, ताकि अपराधी राजनीति से दूर रहें. साथ ही कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ रहे उनके जिन उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनकी जानकारी वेबसाइटों और इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट, दोनों मीडिया में सार्वजनिक करने के निर्देश दिये थे.