ओड़िशा की केंद्रपाड़ा और जम्मू कश्मीर की अनंतनाग सीट पर उपचुनाव क्यों नहीं? चुनाव आयोग पर सवाल

जब चुनाव आयोग छह महीने से भी कम समय होने के बावजूद कर्नाटक की तीन लोकसभा सीटों के उपचुनाव कराने जा रहा है तो उसने ओड़िशा की केंद्रपाड़ा और जम्मू कश्मीर की अनंतनाग सीट पर चुनाव क्यों नहीं कराया? उसने आंध्र प्रदेश में खाली हुई पांच लोकसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा क्यों नहीं की? आयोग का यह फैसला सवाल खड़े करने वाला है। क्योंकि ऐसा लग रहा है कि चुनाव आयोग ने भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए कर्नाटक में उपचुनाव की घोषणा की और उसके हितों को देखते हुए ओड़िशा, कश्मीर और आंध्र में चुनाव नहीं कराया।

ध्यान रहे ओड़िशा की केंद्रपाड़ा सीट के सांसद जय पांड ने इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा मंजूर भी हो गया है। पर आयोग ने वहां उपचुनाव नहीं कराया। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस सीट पर जय पांडा को हर हाल में हराने की ठानी है। अगर वे भाजपा में जाते या भाजपा समर्थित उम्मीदवार होते और हार जाते तो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की बनाई हवा खराब हो जाती।

इसी तरह आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के पांच सांसदों को इस्तीफा मंजूर हो गया है पर वहां उपचुनाव नहीं हो रहे हैं। उपचुनाव होते तो ज्यादा संभावना इस बात की थी कि कांग्रेस, टीडीपी तालमेल करके लड़ते, जिसका असर तेलंगाना विधानसभा पर भी होता। अगर यह गठबंधन चुनाव जीत जाता तो अगले साल के आंध्र विधानसभा चुनाव पर भी इसका बड़ा असर होता।

इसी तरह चुनाव आयोग ने जम्मू कश्मीर की अनंतनाग सीट पर उपचुनाव नहीं कराया है। वह सीट करीब तीन साल से खाली है। सुरक्षा चिंता के नाम पर चुनाव टल रहा था। पर सवाल है कि जब राज्यपाल शासन में शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव हो रहे हैं और भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध जीत रहे हैं तब वहां लोकसभा चुनाव कराने में क्या दिक्कत है? क्या कांग्रेस की मजबूत संभावना को देख कर वहां का चुनाव नहीं टाला जा रहा है?

साभार: नया इंडिया