सुप्रीम कोर्ट: मोदी सरकार से बंद लिफाफे में मांगी जानकारी, कहा, बताएं कैसे हुई राफेल डील? सरकार ने किया विरोध

राफेल सौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से बंद लिफाफे में मांगी जानकारी

राफेल डील पर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से खरीद प्रक्रिया की पूरी जानकारी मांगी है। कोर्ट ने केंद्र से सीलबंद लिफाफे में उस फैसले की प्रक्रिया की डीटेल देने को कहा है, जिसके बाद राफेल जेट की खरीद को लेकर फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से डील हुई।
भारत और फ्रांस के बीच फाइटर प्लेन राफेल को लेकर हुई डील के खुलासे की मांग को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह बताए कि सरकार ने राफेल डील कैसे किया। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि 29 अक्टूबर तक डील होने की प्रक्रिया उपलब्ध कराए और मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल को सीलबंद लिफाफे में जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की।

मुख्य न्यायाधीश ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि हम यह साफ कर दें कि हमने याचिका में लगाए गए आरोपों का संज्ञान नहीं लिया है। यह आदेश केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि फैसला लेने में समुचित प्रक्रिया का पालन किया गया। हम राफेल विमान की कीमत या एयरफोर्स के लिए इसकी उपयोगिता के बारे में नहीं पूछ रहे हैं।इस मामले में अटॉर्नी जनरल का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। संसद में 40 सवाल पूछे गए हैं। लेकिन यह जनहित याचिका नहीं है, बल्कि राजनीतिक फायदे के लिए दायर की गई याचिका है। अंतरराष्ट्रीय समझौते में दखल नहीं दिया जा सकता है।

बता दें कि एक वकील विनीत ढांडा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि कोर्ट डील पर सरकार से रिपोर्ट ले और देखे कि सब सही है या नहीं। वहीं दूसरे वकील ने अपनी याचिका में डील को रद्द करने की मांग की है। साथ ही याचिका में पीएम और अनिल अंबानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।पिछले कई दिनों से कांग्रेस और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार में हुए राफेल सौदे पर सवाल उठाया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट से 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद का जो सौदा किया है, उसका मूल्य पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में विमानों की दर को लेकर जो सहमति बनी थी उसकी तुलना में बहुत अधिक है। इससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। कांग्रेस ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौदे को बदलवाया और एचएएल से ठेका लेकर रिलायंस डिफेंस को दिया गया।