राजिस्थान: गिरता रुपया, हांफता हैण्डीक्राफ्ट निर्यात

डॉलर की मजबूती के कारण न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है बल्कि जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग भी इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है । रुपए के मुकाबले डॉलर के बढ़ते दामों से जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यातकों का घाटा बढ़ता जा रहा है । महज कुछ ही महिनों में डॉलर 65 रुपए से 74 रुपए को छू चुका है । डॉलर के बढ़ते दाम पर ब्रेक नहीं लगा तो आने वाले समय में जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यात के घटने के आसार की उम्मीद है । पत्रिका की खबर के मुताबिक पिछले एक दशक में जिस तेजी से जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग में उछाल आया था, पिछले 2 वर्षो से इसमें जीएसटी, शीशम पर प्रतिबंध, रिफ ण्ड समस्या और अब डॉलर के बढ़ते दामों की वजह से यहां का निर्यात निरन्तर टूटता जा रहा है। डॉलर की मजबूती से भारतीय रूपए में आई गिरावट के चलते निर्यातको की स्थिति न उगलते- न निगलते जैसी हो गई है हैण्डीक्राफ्ट में काम आने वाले टूल्स, वैक्स, पॉलिश, थीनर सहित अधिकतर रॉ मेटीरियल आयात किए जाते है। डॉलर बढऩे से रॉ मेटीरियल भी महंगे होते जा रहे है । पेट्रोल व डीजल के भाव बढऩे से लकड़ी, लोहा व ट्रांसपोर्टेशन के मूल्यों में भी वृद्धि हो गई है । इस कारण हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों का लागत मूल्य बढ रहा है । इससे यहां के निर्यातकों को घाटा हो रहा है ।

एक डॉलर का मूल्य 74 रुपए तक पहुंचने से अमरीकन ग्राहक यहां के निर्यातकों से बढ़े हुए डॉलर के मूल्य के बराबर डिस्काउट मांग रहे है । प्रतिस्पद्र्धा के चलते बायर्स बढ़े हुए दाम देने को तैयार नहीं है । ज्यादातर ग्राहक 65 रुपए डॉलर के हिसाब से अधिक मूल्य नहीं दे रहे है । निर्यातकों को बाजार में जमे रहने के लिए नफ ा दांव पर लगाकर ऑर्डर पूरे करने पड़ रहे है ।

डॉ. भरत दिनेश, अध्यक्ष

जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन

एसोसिएशन केन्द्र सरकार से मांग कर रही है कि बायर्स से डॉलर में नहीं बल्कि रुपए के आधार पर सौदा करने की स्वीकृति दी जाए । इससे डॉलर के भाव के उतार-चढ़ाव से निर्यात पर प्रभाव नही पड़ेगा । रुपए के आधार पर सौदा होने से ही इस समस्या का समाधान संभव है ।

महावीर बागरेचा, उपाध्यक्ष

जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन