छुट्टी के लिए यूपी के सरकारी स्कूलों में चल रहा है फर्जीवाड़ा, ऐक्शन में आया शासन

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरशाह और टीचर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। दरअसल, शासन में अभिलेखों की जांच में इस हेराफेरी का खुलासा हुआ है। आरोप है कि बीमारी के बहाने छुट्टी लेने वाले टीचरों को सामान्य छुट्टी पास की जा रही हैं। गैरहाजिर होने के बावजूद टीचरों को हाजिर दिखाया जा रहा है।

फर्जीवाड़े के मामले में शासन ऐक्शन में आ गया है। इसी के साथ उत्तर प्रदेश के सभी बीएसए को नाराजगी भरी चिट्ठी लिखकर तत्काल अनियमितता रोकने और कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। यही नहीं, साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों से ऐक्शन की रिपोर्ट भी मांगी है। ऐक्शन न करने पर शासन स्तर से कदम उठाने की चेतावनी दी गई है। सारी अनियमितताओं के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को शासन ने दोषी माना है।

चिट्ठी लिखकर कही यह बात
विशेष सचिव बेसिक शिक्षा आनंद कुमार सिंह ने यूपी के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को 12 अक्टूबर को ही इस बारे में आगाह करते हुए चिट्ठी लिखी है। इस पत्र में कहा गया है कि खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की अनियमितताओं की शिकायतें जिलों से लगातार मिल रही हैं।
छुट्टी के बावजूद भर दी जाती है हाजिरी

चिट्ठी में विशेष सचिव ने लिखा है कि बेसिक शिक्षा के स्कूलों के बारे में शासन को जानकारी मिली है कि वहां स्कूलों में तैनात काफी शिक्षक और शिक्षिकाएं अनियमित तौर से गैरहाजिर रहते हैं, लेकिन बीईओ अभिलेखों में बाद में उनको हाजिर दिखा देते हैं। इसी तरह शिक्षक और शिक्षिकाएं लीव विदआउट पेमेंट होती हैं लेकिन उनका पूरा वेतन बीईओ जारी कर देते हैं। शिक्षकों के रेकॉर्ड देखने से खुलासा हुआ कि मेडिकल लीव लेने के बाद भी उनका वेतन बिना मेडिकल लीव दिखाए जारी कर दिया जा रहा है। मेडिकल लीव उनकी सर्विस बुक में दर्ज भी नहीं की जाती हैं।

विशेष सचिव की नाराजगी भरी चिट्ठी में आगे कहा गया है कि जिलों में तमाम अमान्य विद्यालय संचालित हैं। ऐसे विद्यालयों के लिए शासनादेश के मानक के मुताबिक बीईओ जांच रिपोर्ट भेजते हैं लेकिन शासन स्तर से क्रॉस चेक कराने पर हालात उलट मिलते हैं, यह गंभीर है। इसके अलावा शिक्षक और शिक्षिकाओं की मौजूदगी उनके हाजिरी रजिस्टर से मिलान नहीं की जाती, वैसे ही वेतन बना दिया जाता है।
सोर्स: नवभारत टाइम्स