यूपी: बीएड को प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त करने के खिलाफ बीटीसी धारक लामबंद

रबीअ बहार

बीएड को प्राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानि एनसीटीई ने पिछले दिनों प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक पद हेतु बीएड धारकों को पात्रता दिए जाने के बाद मामला विवादित हो गया है। डीएलएड संयुक्त मोर्चा का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवमानना है और वो एनसीटीई के इस फैसलो को कोर्ट में चुनौती देंगे। सुप्रीम कोर्ट बीएड धारकों को प्राथमिक शिक्षक बनाने से रोक लगा चुका है ऐसे में एनसीटीई को यह अधिकार नहीं है कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलकर नया आदेश जारी कर दे।

एनसीटीई ने पिछले महीने 2010 के आदेश में संशोधन करके बीएड धारकों को भी प्राथमिक शिक्षक बनने का मौका मुहैया कराया है। इस आदेश से टीईटी यानि शिक्षक पात्रता परीक्षा और शिक्षक भर्तियों में दावेदारों की संख्या बढ़ना तय है। ऐसे में प्रतिस्पर्धी डिप्लोमा धारक इस आदेश के खिलाफ लामबंद होना शुरू हो गए हैं। बीटीसी और शिक्षामित्र हाईकोर्ट में जल्द ही आदेश के खिलाफ अपील दायर करेंगे।

टेट 2017 के पैरवीकार रिज़वान अंसारी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट बीएड धारकों को प्राथमिक शिक्षक बनाने से रोक लगा चुका है। अब एनसीटीई ने उन्हें अनुमति देकर शीर्ष कोर्ट के आदेश की अवमानना की है। सुप्रीम कोर्ट को इस पर विचार करना होगा कि एनसीटीई का आदेश सही है या नहीं। जब बीएड को प्राथमिक शिक्षक बनने का रास्ता खोला जा सकता है, तब ऐसा ही कदम शिक्षामित्रों के लिए क्यों नहीं उठाया जा सकता है। बीएड अभ्यर्थी इस आदेश से खुश हैं उनका कहना है कि यह मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब वह पूरी हो गई है।

एमएससी ग्रुप के पैरवीकार मुहम्मद फैसल के अनुसार आरटीई एक्ट धारा 23 बीएड डिग्री धारकों को नियुक्ति में बाधक है। एक्ट के अनुसार “केन्‍द्र सरकार द्वारा प्राधिकृत अकादमिक प्राधिकरण द्वारा यथा निर्धारित न्‍यूनतम योग्‍यता रखने वाले व्‍यक्ति शिक्षक के रूप में नियोजित किए जाने के पात्र होंगे।” चूंकि बीएड धारक निर्धारित अर्हता नहीं रखते हैं उन्हें 6 माह की विशिष्ट बीटीसी करना होगी इसलिए उन्हें सीधे नियुक्ति नहीं दी जा सकती है। साथ ही एक्ट के अनुसार अगर पूर्ण अर्हता रखने वाले अर्थात बीटीसी धारक अभ्यर्थी उपलब्ध न हों तो ही बीएड को नियुक्ति दी जा सकती है।

एमएससी ग्रुप की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार बीटीसी की कमी का हवाला देकर एक बार बीएड की भर्ती 2011 में कर चुकी है। इस मामले में सरकार दुबारा भर्ती न करने की बात कर चुकी है। ऐसे में बीएड की भर्ती करना अवैध होगा। राज्य सरकार यदि ऐसा करती है तो ये राजनीतिक लाभ के लिए गैर कानूनी कदम होगा। ग्रुप इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है।