‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ परियोजना: 75 हजार आदिवासियों ने किया विरोध का ऐलान, बताया विनाशकारी

गुजरात ते 75 हजार आदिवासियों ने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को लेकर एक ऐसा ऐलान कर दिया है कि सरकार के पसीने छूट सकते हैं।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र 31 अक्टूबर को गुजरात में दुनिया की सबसे ऊंची (182 मीटर) सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरण करने वाले हैं। 2990 करोड़ रूपए की लागत से तैयार हुई इस प्रतिमा के लिए केंद्र और गुजरात सरकार ने युद्धस्तर पर काम किया है। लेकिन नर्मदा नदी के पास साधु बेट द्वीप स्थित इस प्रतिमा से कुछ ही दूरी पर स्थित इलाके के हजारों ग्रामीण इस परियोजना के विरोध में भारी प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। अगर आदिवासियों ने अपनी इस धमकी को हकीकत में बदल दिया तो गुजरात सरकार के लिए 31 अक्टूबर का दिन मुश्किलें बढ़ा सकता है।

पीएम के विरोध की तैयारी में 75,000 आदिवासी

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक नर्मदा जिला के केवड़िया में स्थानीय आदिवासी संगठनों में बेहद गुस्सा है। उन्होंने कहा कि ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ परियोजना से प्रभावित लगभग 75,000 आदिवासी प्रतिमा के अनावरण और प्रधानमंत्री का विरोध करने का मन बना चुके हैं। आदिवासी नेता डॉक्टर प्रफुल वसावा ने कहा कि उस दिन हम शोक मनाएंगे और 72 गांवों में किसी घर में खाना नहीं पकाया जाएगा। वह परियोजना हमारे विनाश के लिए है। आदिवासी रिवाज के अनुसार, घर में किसी की मृत्यु होने पर शोक के तौर पर घर में खाना नहीं पकाया जाता है।

पटेल का विरोध नहीं लेकिन सरकार का विचार आदिवासी विरोधी: आदिवासी नेता

वसावा ने कहा आदिवासियों के अधिकारों का हनन हो रहा है। हमारा गुजरात के महान सपूत सरदार पटेल से कोई विरोध नहीं है, और उनका सम्मान होना चाहिए। हम इसके खिलाफ नहीं है लेकिन सरकार का विकास का विचार एकतरफा और आदिवासियों के खिलाफ है। आदिवासी शिकायत कर रहे हैं कि उनकी जमीनें ‘सरदार सरोवर नर्मदा परियोजना’, उसके नजदीक स्थित ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ तथा इसके साथ-साथ क्षेत्र में प्रस्तावित अन्य पर्यटन गतिविधियों के लिए ले ली गई हैं। वसावा के अनुसार, ‘असहयोग आंदोलन’ को प्रदेश के लगभग 100 छोटे-बड़े आदिवासी संगठन समर्थन दे रहे हैं। विरोध प्रदर्शन में उत्तरी गुजरात के बनसकांठा से दक्षिणी गुजरात के डांग्स जिले तक लगभग नौ आदिवासी जिले आंदोलन में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर को ‘बंद’ सिर्फ स्कूलों, कार्यालयों या व्यावसायिक संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि घरों में भी (खाना ना पकाकर) विरोध किया जाएगा।

‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर जारी है राजनीति

‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर राजनीति भी जमकर हो रही है। पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि मोदीजी ने गुजरात में सरदार पटेल की सबसे बड़ी मूर्ति लगाने का दावा किया था। लेकिन बाद में यह खुलासा हुआ कि मूर्ति के पीछे मेड इन चाइना लिखा हुआ है। जिसके दो दिन बाद पीएम मोदी ने राहुल को जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस सरदार वल्लभ भाई पटेल की ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को मेड इन चाइना कहकर उनका अपमान कर रही है।