सीबीआई पर सफाई देने वाले वित्त मंत्री कौन होते हैं, पीएम दें स्पष्टीकरण: शरद पवार

सीबीआई तो प्रधानमंत्री के मातहत ही काम करती है, इसलिए अगर वहां उलटफेर हुआ है तो सफाई भी प्रधानमंत्री को ही देनी चाहिए, वित्त मंत्री कौन होते हैं। यह सवाल उठाया है एनसीपी नेता शरद पवार ने।

एनसीपी नेता शरद पवार ने सीबीआई में ऊपर से नीचे तक हुए बड़े पैमाने पर फेरबदल के लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण मांगा है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक प्रेस कांफ्रेंस में पवार ने कहा कि सीबीआई सीधे प्रधानमंत्री के मातहत है, ऐसे में वहां जो कुछ ही हुआ है उस पर सफाई भी पीएम को ही देनी चाहिए।शरद पवार ने कहा कि सीबीआई के जिन दो आला अफसरों को छुट्टी पर भेजा गया है, उनमें से एक गुजरात कैडर के हैं और उनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही की थी। इन अधिकारियों को क्यों हटाया गया, इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद स्पष्टीकरण दें।

उन्होंने सवाल पूछा कि पीएम तो कई बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं, उन्हें इन अधिकारियों के बारे में सबकुछ पता है, फिर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के लिए गलत काम करने वाले अधिकारियों की नियुक्ति कैसे की? शरद पवार ने कहा कि मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें गुजरात काडर के अधिकारियों के कामकाज का सारा ज्ञान था।

उन्होंने कहा कि सीबीआई वित्त मंत्री के अंतर्गत नहीं आती है, अगर सीबीआई अधिकारियों को छुट्टी पर भेजा गया है तो इसकी सफाई वित्त मंत्री क्यों दे रहे हैं, इसका स्पष्टीकरण तो प्रधानमंत्री को देना होगा, तभी असलियत का चलेगा। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है।पवार ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा ने राफेल में हुए कथित घोटाले को लेकर विस्तृ़त शिकायत सीबीआई के पास की थी। उनके द्वारा की गई शिकायत को उन्होंने पढ़ा था, उनकी शिकायत पर सीबीआई ने क्या कार्यवाही की?

पवार ने कहा कि, “पीएम मोदी हर जनसभा में कहते हैं कि एक परिवार ने देश पर राज किया है, मैं कहना चाहता हूं कि उस परिवार ने देश के लिए बड़ी कुर्बानी दी है। जवाहरलाल नेहरू कई बार जेल गए. सब जानते हैं कि किस तरह से इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या हुई। “ उन्होंने कहा कि पीएम ने बेकार के ख्वाब दिखाए, वो सपने कितना पूरे हुए इस पर पीएम के पास कहने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वो सिर्फ एक परिवार की बात करते हैं।

गौरतलब है कि सीबीआई में दो शीर्ष अधिकारियों के बीच घमासान चल रहा था। इस दौरान राकेश अस्थाना और कई अन्य के खिलाफ कथित रूप से मीट कारोबारी मोइन कुरैशी की जांच से जुड़े सतीश सना नाम के व्यक्ति के मामले को रफा-दफा करने के लिए घूस लेने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके एक दिन बाद डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को सीबीआई ने अस्थाना पर उगाही और फर्जीवाड़े का मामला भी दर्ज किया।सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी इस जंग के बीच, केंद्र ने सीवीसी की सिफारिश पर दोनों अधिकारियों को छु्ट्टी पर भेज दिया और सीबीआई में संयुक्त निदेशकर नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक बना दिया गया। इसके बाद 13 अधिकारियों का तबादला कर दिया।