एसएससी परीक्षा घोटालाः सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार, नये सिरे से परीक्षा कराने पर मांगा जवाब

एसएससी परीक्षा घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षाओं को रद्द कर फिर से परीक्षा कराने को बेहतर बताया

सुप्रीम कोर्ट ने एसएससी पेपर लीक मामले में परीक्षाओं को रद्द कर नये सिरे से परीक्षा कराने को बेहतर माना है। हालांकि कोर्ट ने इस पर फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए उसका जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक मामले में सोमवार को अहम सुनवाई करते हुए परीक्षाओं को रद्द कर नये सिरे से परीक्षा कराने को बेहतर बताया है। कोर्ट का मानना है कि पेपर लीक होने से लाभ पाने वाले सभी दोषियों को पकड़ पाना संभव नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए इस पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इस पूरे मामले की एक रिपोर्ट तैयार करे कि गलती कहां और किससे हुई है।बता दें कि इसी साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने एसएससी संयुक्त स्नातक स्तर परीक्षा 2017 (एसएससी सीजीएल) और एसएससी संयुक्त उच्चतर माध्यमिक स्तर परीक्षा 2017 (एसएससी कंबाइंड सीनियर सेकेंडरी लेवल) का रिजल्ट जारी करने पर रोक लगाते हुए कहा था कि पहली नजर में पूरी एसएससी परीक्षा और इसकी प्रक्रिया में गड़बड़ी नजर आ रही है। न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने नतीजों की घोषणा पर रोक लगाते हुए कहा था कि एसएससी की दूषित परीक्षा का लाभ लेकर लोगों को सेवा में आने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

बता दें कि फरवरी 2017 में हुई एसएससी परीक्षा का प्रश्न पत्र पहले ही ऑनलाइन लीक हो गय था। इसके अलावा परीक्षा की प्रक्रिया में भी कई गड़बड़ियं सामने आई थीं। इस मामले के सामने आने के बाद हजारों छात्रों ने दिल्ली में कई दिनों तक प्रदर्शन किया था औऱ सीबीआई जांच की मांग की थी। सात दिनों तक चले परीक्षार्थियों के प्रदर्शन के बाद मार्च में केंद्र सरकार ने छात्रों की मांग मानते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिये थे। सीबीआई ने अपनी जांच के आधार पर मई में 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जिनमें सिफी टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के भी 10 कर्मचारियों के नाम थे। सीबीआई ने अपनी स्थिति रिपोर्ट मे कर्मचारी चयन आयोग के अनेक अधिकारियों और परीक्षा के प्रश्न पत्रों के संरक्षक पर भी आक्षेप लगाए थे।