इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉक्टर्स को हस्तलिखित रिपोर्ट के साथ प्रिंट प्रति भी देने का दिया निर्देश, डॉक्टर्स की लिखावट से होती है दिक्कत

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में खराब लिखावट को लेकर तीन डॉक्टरों पर हाल ही में 5,000-5,000 रुपए का जुर्माना लगाया था

डॉक्टरों के पर्चों पर उनकी लिखावट अक्सर इतनी बुरी होती है कि आम आदमी को समझने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़े. ऐसे में आपराधिक मामलों में पोस्टमार्टम या इससे संबंधी डॉक्टरों की रिपोर्ट में अगर उनकी लिखावट ना समझ आए तो कोर्ट तक के लिए यह परेशानी का सबब बन जाती है.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने आपराधिक मामलों में ना पढी जा सकने वाली डाक्टरों की मेडिको लीगल रिपोर्ट से परेशान होकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हाथ से लिखी मूल रिपोर्ट के साथ साथ कंप्यूटर से प्रिंट की गई प्रति भी मुहैया कराएं.

अदालत ने शुक्रवार को कहा कि कंप्यूटर से प्रिंट की गई रिपोर्ट पर संबंधित डाक्टर या किसी अन्य अधिकृत व्यक्ति के दस्तखत भी होने चाहिए. जांच पूरी होने के बाद प्रिंट रिपोर्ट भी पुलिस की रिपोर्ट का हिस्सा होना चाहिए.

न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति डी के सिंह की पीठ ने कहा कि कई डाक्टरों पर दंड लगाए जाने के बावजूद मेडिको लीगल रिपोर्ट या पोस्टमार्टम रिपोर्ट ऐसी आ रही हैं, जिन्हें पढ़ना मुश्किल होता है और रिपोर्ट पढ़ने के लिए संबंधित डाक्टर को अदालत में बुलाना पड़ता है.

अदालत ने कहा कि सिर्फ इसलिए किसी डाक्टर को अदालत में बुलाना कि उसकी रिपोर्ट पर लिखावट खराब है, प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित है.

हालांकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में खराब लिखावट को लेकर तीन डॉक्टरों पर हाल ही में 5,000-5,000 रुपए का जुर्माना लगाया था.