ब्रांड मोदी अब राम भरोसे है!

चन्द्रकान्त त्रिपाठी

मोदी जी का सितारा उतर रहा है यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं। इस सितारे को फिर उभारने के लिए मोदी ने 3200 करोड़ रुपये में सरदार पटेल की 182 मीटर की प्रतिमा बनवायी लेकिन शायद ही यह सहारा उनके काम आए। ऐसे में बस राम मंदिर का ही एक आसरा नजर आ रहा है। करीब साल भर से मोदी सरकार की साख अप्रत्याशित रूप से गिरी है। जिस व्यक्ति पर उंगली उठाने भर से समर्थकों की भौहें तन जाती थीं, उसी पर इन दिनों सोशल मीडिया तक में चुटकुलों की बाढ़ आ गयी है और मुश्किल से ही कोई प्रतिरोध करता दीखता है।

पिछले एक महीने में राफेल, सीबीआई, रिजर्व बैंक और सुप्रीम कोर्ट जैसी घटनाओं ने लोगों को मोदी के प्रति नजरिया बदला है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर तो सरकार पहले से असफल है। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता जा रहा है, बेरोजगारी बढ़ रही है। खाद और डीजल-पेट्रोल भी चुभ रहे हैं। माना जा रहा है कि आनेवाले महीनों में खाद्यान्न, फल-सब्जी और भी महंगे हो सकते हैं। पिछले तीन साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता रहा तो सरकार ने उससे अपना घाटा पूरा कर करने का तर्क देकर दाम नहीं घटाये। यहां तक कि भविष्य के लिए निधि भी नहीं बनाई। नोटबंदी ने पहले ही काम-धंधों को बर्बाद कर दिया था। अर्थव्यवस्था में निश्चित ही भयंकर मंदी आई। कामगार रोजी-रोटी के लिए परेशान हो गए। दर्जनों बदलावों के बावजूद भी जीएसटी उतनी प्रभावी नहीं साबित हो पा रही जितना कि दावा किया गया था।

रिजर्व बैंक से सरकार की तनातनी से आर्थिक बुद्धिजीवियों में गलत संदेश गया है। सीबीआई मामला भी सिर्फ आलोक वर्मा बनाम राकेश अस्थाना विवाद नहीं है बल्कि सीबीआई बनाम प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का मामला बन गया है। रही-सही कसर राफेल मामले ने पूरी कर दी है।

कांग्रेस राज की अनियमितताओं व भ्रष्टाचार से तंग आयी जनता नरेंद्र मोदी के प्रति आशाओं से भरी थी और यही मोदी की सबसे बड़ी ताकत रही लेकिन यह ताकत अब अवसान की ओर है। निश्चित ही अब भाजपा पुराने अस्त्रों पर नई धार लगाएगी। आने-वाले महीनों में या तो जय जवान और मोर्चा होगा, नहीं तो हिंदू-मुसलमान होगा। सबरीमाला के बाद राम मंदिर का दांव मिल ही गया है। अगर ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे के दम पर सत्ता में आयी सरकार की कसौटी विकास नहीं, राम मंदिर होगा तो बीजेपी ही नहीं, पूरा देश ही राम भरोसे है।

वरिष्ठ पत्रकार और संपादक चंद्रकांत त्रिपाठी का नज़रिया साभार:नमस्कार न्यूज डॉट कॉम