सरकार ने केंद्रीय बैंक से मांगे अतिरिक्त 3.6 लाख करोड़, आरबीआई ने किया इनकार

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र की मोदी सरकार और रिज़र्व बैंक के बीच तनाव की बड़ी वजह 3.6 लाख करोड़ रुपये हैं.

अख़बार लिखता है कि वित्त मंत्रालय ने आरबीआई से कहा था कि वो यह राशि उसे दे दे और आरबीआई ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.

ख़बर के मुताबिक रिज़र्व बैंक के पास कुल 9.59 लाख करोड़ रुपये हैं. यानी वित्त मंत्रालय द्वारा मांगी गई राशि आरबीआई के पास जमा कुल राशि के एक तिहाई से ज़्यादा थी.

अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि ये पैसे सरकार को दिए जाने से अर्थव्यवस्था में अस्थिरता पैदा होने का ख़तरा था और यही वजह है कि रिज़र्व बैंक ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

इससे पहले 2017-18 में वित्त मंत्रालय ने पूंजी की ज़रूरत का हवाला देते हुए रिज़र्व बैंक से उसके पसा जमा कुल धनराशि मांगी थी और तब भी आरबीआई ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था.

मोदी सरकार और रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बीच जारी गतिरोध को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला है. उन्होंने वित्त मंत्रालय के आरबीआई को भेजे एक प्रस्ताव पर मंगलवार को ट्वीट कर कहा, ‘36,00,00,00,00,000… प्रधानमंत्री के जीनियस आर्थिक सिद्धातों की वजह से हुई गड़बड़ियों को दुरुस्त करने के रिजर्व बैंक से इतनी रकम चाहिए. मिस्टर पटेल (उर्जित पटेल) उनके साथ खड़े हो जाइए. राष्ट्र की रक्षा करें.’

राहुल का यह ट्वीट वित्त मंत्रालय के केंद्रीय बैंक को 3.6 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त रकम (सरप्लस अमाउंट) को ट्रांसफर करने के भेजे गए प्रस्ताव के संदर्भ में आया है.

वित्त मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि इस अतिरिक्त रकम को केंद्रीय बैंक और सरकार संयुक्त रूप से मैनेज कर सकते हैं. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार वित्त मंत्रालय का दावा है कि मौजूदा आर्थिक पूंजी ढांचा, जो आरबीआई की पूंजी आवश्यकताओं और सरकार को इसके ट्रांसफर के शर्तों को करता है, वो आरबीआई के जोखिम के पुराने रूढ़िवादी मूल्यांकन पर आधारित है.

अरुण जेटली-नरेंद्र मोदी

अरुण जेटली-नरेंद्र मोदी

आरबीआई इसे अपने रिजर्व में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के घुसपैठ के प्रयास के रूप में देख रही है. जिसका मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता पर काफी असर पड़ सकता है. सूत्रों ने अखबार को बताया कि रिजर्व बैंक ने इस वजह से प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया