डिफॉल्टर हो रही कंपनियों में लगाया जा रहा एनपीएस का पैसा

समिति की बैठक में डिफॉल्टर कंपनियों में एनपीएस (न्यू पेंशन स्कीम) की राशि लगाने का मुद्दा छाया रहा। मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि एक साल में 10 बार डिफॉल्टर हुई कंपनी में एनपीएस का पैसा लगाया जा रहा है।

Amarujala.com के अनुसार मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि पेंशन की अधिकतर राशि इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) में निवेश की गई है। इसकी 40 सहायक कंपनियां हैं। पिछले एक हफ्ते में इस कंपनी की रेटिंग को एए-प्लस से घटाकर निल कर दिया गया है। इसे जंक स्टेटस कहते हैं। इस पर 90 हजार करोड़ रुपये का लोन डूब रहा है।

नतीजतन, इस कंपनी में जिसका भी पैसा लगा होगा, वह डूब जाएगा। यानी, आम कार्मिकों के प्रॉविडेंट फंड और पेंशन फंड का लगा पैसा डूब रहा है। अब इस स्थिति पर काबू पाने के लिए एलआईसी से मदद मांगी गई है। इसी तरह आईडीबीआई पर एनपीए का बोझ बढ़ा तो एलआईसी को बुलाया गया। डूबते कर्ज को बचाने के लिए एलआईसी कब तक मदद करने की स्थिति में रहेगी, इस पर भी सवालिया निशान लग गया है। इन हालात में कर्मचारी और शिक्षकों को पेंशन मिल पाएगी, इसकी कोई गारंटी नही है।

मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि भविष्य में पुरानी पेंशन बहाली से इतर किसी बिंदु पर वार्ता करने पर हम बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। इस बारे में मुख्य सचिव को भी बता दिया गया है। उन्होंने कहा, समिति की पहली बैठक ही पूरी तरह विफल रही। अधिकारी सिर्फ न्यू पेंशन स्कीम पर बात करते रहे, जबकि हमारा स्पष्ट मानना है कि यह व्यवस्था कार्मिकों व शिक्षकों के हित में नहीं है।