पीएमओ परेशान है!

हरि शंकर व्यास

सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा जनवरी में रिटायर होने है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पद पर बहाल किया या उनकी आगे और जांच की बात करके फैसला टाला इन दोनों ही स्थितियों में प्रधानमंत्री दफ्तर, गुजराती लॉबी के अफसर डरे और सटके रहने है। सीवीसी की दी गई रपट और उस पर फिर अदालत का आलोक वर्मा से लिखित जवाब लेना मामूली बात नहीं है। बुनियादी सवाल है कि राकेश अस्थाना ने रिश्वत लेने का जो आरोप आलोक वर्मा पर लगाया था उसकी गंभीरता सीवीसी की रपट से बढ़ी होगी या दूसरी इधर-उधर की बातों का फैलाव हुआ होगा? जवाब फैसला आने पर ही मालूम होगा। मौटे तौर पर राकेश अस्थाना अपना सारा मतलब गंवा चुके है। प्रधानमंत्री दफ्तर की गुजराती लॉबी के लिए अब उनका कोई मतलब नहीं है। तभी पूरे घटनाचक्र से पीएमओ की गुजराती लॉबी की मनोदशा का सवाल अहमं है। अफसर रूटिन के काम भी क्या कायदे से कर पा रहे होगे?

मोदी सरकार और मोदी-शाह की राजनैतिक तैयारियों को सबसे बड़ा झटका है जो लोकसभा चुनाव से ऐन पहले सीबीआई का हथियार भौथरा गया है। चंद्रबाबू नायडू की इस हिम्मत का मामूली अर्थ नहीं जो उन्होंने अपने राज्य मे सीबीआई को अधिकारशून्य बना दिया। प्रदेश सरकार को ऐसा करने का हक है, यह चंद्रबाबू नायडु ने बताया है तो पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल जैसे गैर-भाजपाई राज्य सीबीआई को अपने यहां निष्क्रिय बना कर विरोधियों को निपटाने के एजेंड़े को फुस्स बनवा सकते है। सोचे कि प्रधानमंत्री के थाने याकि सीबीआई का थानेदार बंगाल, आंध्र, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा में जांच करने का डंडा न घूमा सकें और उसकी मान्यता वहां खत्म हो जाए तो प्रधानमंत्री दफ्तर से फिर कौन मुख्यमंत्री या विपक्षी सरकार डरेगी।

हां, असली पेंच सीबीआई में और उससे प्रधानमंत्री दफ्तर में बनी किंकत्वर्यमूढता से मायावती, ममता बनर्जी से ले कर कांग्रेस सबको अगले छह महीने चुनाव पर फोकस करने का मौका मिलने का है। मोदी-शाह और उनकी टीम की विपक्ष को घेरने की रणनीति पंचर हो गई है। जब तक सीबीआई का नया डायरेक्टर नहीं बनेगा तब तक राजनैतिक एजेंड़े पर कोई काम नहीं होना है। और यदि आलोक वर्मा वापिस डायरेक्टर के रूप में बहाल हो गए तो मोदी-शाह को दो महीने इस चिंता में रहना होगा कि जैसे भी हो चुपचाप समय कटे। कहीं जांच उलटी दिशा में चालू न हो जाए।

तभी लाख टके का सवाल है कि प्रधानमंत्री दफ्तर, गुजराती लॉबी और मोदी-शाह की राजनीति फिलहाल कितनी तरह की अनिश्चितताओं ओर गतिरोधों में अटकी हुई होगी? साभार:नया इंडिया