सीबीआई डीआईजी का सनसनीखेज़ आरोप: मोदी के मंत्री ने ली रिश्वत, डोवाल ने अस्थाना के घर छापा मारने से रोका

सोमवार को सीबीआई के डीआईजी मनीष कुमार सिन्हा ने एक याचिका दायर की। इस याचिका में उन्होंने मोदी सरकार में कोयला एवं खदान राज्य मंत्री हरिभाई पार्थीभाई पटेल पर मोईन कुरैशी मामले में करोड़ों रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाया।

छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के मामले की सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में एक नया मोड़ आ गया है। सोमवार को सीबीआई के डीआईजी मनीष कुमार सिन्हा ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए एक याचिका दायर की। इस याचिका में उन्होंने मोदी सरकार में कोयला एवं खदान राज्य मंत्री हरिभाई पार्थीभाई पटेल पर मोईन कुरैशी मामले में करोड़ों रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाया। सिन्हा की याचिका के मुताबिक, गुजरात से सांसद हरिभाई पार्थीभाई को अहमदाबाद के किसी विपुल नाम के शख्स द्वारा पैसे दिए गए थे। वेबसाइट ‘द वायर’ ने इस याचिका में लगाए आरोपों को लेकर हरिभाई पार्थीभाई को कुछ सवाल भेजे थे, जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।इसके अलावा मनीष कुमार सिन्हा ने अपनी याचिका में यह भी बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के कथित तौर पर मोईन कुरैशी मामले में गिरफ्तार भाईयों मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद से नजदीकी संबंध हैं।

याचिका में एमके सिन्हा ने कहा है, “मनोज प्रसाद (अस्थान मामले में गिरफ्तार बिचौलिया) के मुताबिक उसके पिता दिनेश्वर प्रसाद और जॉइंट सेक्रेटरी पद से रिटायर्ड सोमेश के अजित डोवाल (एनएसए) से अच्छे संबंध रहे हैं।” सिन्हा का कहना है कि जब मनोज को सीबीआई दफ्तर जांच के लिए लाया गया तब वह बुरी तरह बौखलाया हुआ था। वह हैरान था कि एनएसए डोभाल के साथ उसके अच्छे संबंध होने के बावजूद सीबीआई उसे कैसे उठा सकती है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि मनोज प्रसाद ने दावा किया है कि समोश और समंत गोयल ने अजित डोवाल के निजी और महत्वपूर्ण काम किए हैं।

उनकी याचिका में साफ तौर यह आरोप लगाया गया है कि सीबीआई के विशेष निदेशक और डीएसपी देवेंद्र कुमार के खिलाफ चल रही सीबीआई जांच के एक महत्वपूर्ण मौके पर डोभाल ने हस्तक्षेप किया, ताकि उनके मोबाइल फोन सबूत के तौर पर जब्त न किए जाएं। सिन्हा ने दावा किया कि उनके व्हाट्सएप संदेशों में उनके खिलाफ कई सबूत थे। यहां तक कि डोभाल ने अस्थाना के आवास में की जा रही तलाशी अभियान को भी रोकने के निर्देश दिए थे।

सिन्हा ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि रिश्वत के लेन-देन में शामिल उद्योगपति सना सतीश बाबू की मुलाकात सीवीसी केवी चौधरी से भी हुई थी और उस मुलाकात में मोईन कुरैशी मामले की चर्चा की गई थी। इसके बाद सीवीसी ने राकेश अस्थाना को बुलाकर इसके बारे में पूछा था। ‘द वायर’ ने केवी चौधरी से जब इस मामले के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और इसे लेकर मीडिया से बात करना सही नहीं है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि भारत की खूफिया एजेंसी ‘रॉ’ के अधिकारी सामंत गोयल की कॉल रिकॉर्डिंग भी मौजूद है जिसमें वह कह रहे हैं, ”पीएमो ने सीबीआई के मुद्दे को मैनेज कर लिया है।” सिन्हा का कहना है कि इस बातचीत वाली रात को ही अस्थाना मामले में जांच करने वाली पूरी सीबीआई टीम को हटा दिया गया। सिन्हा ने यह भी दावा किया है कि सना सतीश बाबू ने मोइन कुरैशी मामले में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) कमिश्नर केवी चौधरी से भी मुलाकात की। यह मीटिंग यूनियन लॉ सेक्रेटरी सुरेश चंदा ने 11 नवंबर को करायी।