चुनाव के चलते आरबीआई बोर्ड की बैठक में सरकार ने नहीं दिखाया कोई तेवर, फंड सरप्लस पर कमेटी बनाने का फैसला

तसलीम खान

आरबीआई बोर्ड की सोमवार को हुई बैठक में कुछ अहम फैसले हुए, लेकिन सरकार ने नहीं दिखाया कोई तेवर
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, ऐसे में सरकार कोई ऐसी सुर्खी नहीं चाहती जिससे यह संदेश जाए कि वह देश की एक और स्वायत्त संस्था के पर कतरना चाहती है। इसीलिए, सोमवार को हुई आरबीआई बोर्ड की बैठक में ऐसा कुछ नहीं हुआ जिसकी आशंका जताई जा रही थी।

न तो सरकार ने रिजर्व बैंक पर अपने कैश सरप्लस को सरकार के देने का दबाव डाला, न ही गैर वित्तीय सरकारी संस्थाओं को पूंजी देने के लिए कहा और न ही एनपीए वाले बैंकों के खिलाफ आरबीआई के सख्त रवैये में ढिलाई देने का इशारा किया। आरबीआई बोर्ड ने अपनी एडवाईज़री भूमिका बरकरार रखी, नतीजतन आशंकाओं को खारिज करते हुए आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने भी इस्तीफा नहीं दिया।अलबत्ता इतना जरूर हुआ कि आरबीआई के कैश सरप्लस के प्रबंधन पर फैसला लेने के लिए एक कमेटी बनाने का निर्णय हुआ। इस कमेटी के सदस्यों का चयन भी आरबीआई गवर्नर और वित्त मंत्री मिलकर करेंगे।यह तो रहा मोटा-मोटी वह सार जो सोमवार को नौ घंटे से ज्यादा वक्त तक चली आरबीआई बोर्ड की बैठक से निकलकर सामने आया। अच्छी बात यह रही कि जो कमेटी आरबीआई के कैश सरप्लस पर फैसला लेगी, उम्मीद है उसमें आरबीआई की कार्यशैली की तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग होंगे, क्योंकि रिजर्व बैंक के कैश सरप्लस का मामला एकदम सीधा नहीं है कि अतिरिक्त पैसा रखा है और उसे कहीं भी लगा दिया जाए या किसी को दे दिया जाए, बल्कि यह एक तकनीकी मामला है, और आरबीआई की कार्यशैली के जानकार ही इस पर फैसला लेंगे।

इसके अलावा कुछ और मुद्दों पर भी सहमति बनी:सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों यानी एमएसएमई को कर्ज देने की नई नीति बनाई जाएगीएमएसएमई के लिए 25 करोड़ रुपये तक का कर्ज मंजूर किया जाएगाप्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन यानी पीसीए के तहत बैंकों की हालत की समीक्षा होगीवित्तीय क्षेत्र में नकदी के प्रवाह को बनाए रखने की कोशिश होगी, इस पर आखिरी फैसला 14 दिसंबर की बोर्ड बैठक में होगाआरबीआई के 9.69 लाख करोड़ रुपए के फंड सरप्लस के मुद्दे की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनेगीआरबीआई की आर्थिक पूंजी रूपरेखा ढांचे की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित होगीसमिति के सदस्यों और संदर्भ शर्तों को सरकार और आरबीआई मिलकर तय करेंगेआरबीआई बोर्ड की बैठक के नतीजों और उसमें हुए फैसलों पर प्रतिक्रिया में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस बात पर संतोष जताया कि आरबीआई के कामकाज में दखलंदाज़ी से सरकार ने कदम पीछे खींचे हैं।

उन्होंने कहा कि, “अब कम से कम मई 2019 (अगले लोकसभा चुनाव) तक आरबीआई का कैश रिजर्व सुरक्षित है।”

P. Chidambaram

My guess is that the independent directors (at least most of them) realized that the government was on a perilous course and refused to go beyond giving advice to the RBI

P. Chidambaram

@PChidambaram_IN
There is no harm in a technical committee examining the issue of Reserves. At least the Reserves are safe until May 2019!

एक बिजनेस न्यूज चैनल से बातचीत में पी चिदंबरम ने कहा कि, “आरबीआई के फंड सरप्लस का मामला बेहद तकनीकी है, और इसे आरबीआई की कार्शैली जानने वाले विशेषज्ञ ही समझ सकते हैं।” उन्होंने कहा कि आरबीआई बोर्ड के सलाहकार भूमिका में ही रहना चाहिए।

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक और सरकार के बीच काफी समय से तनातनी चल रही है और हालात इतने बिगड़ गए थे कि गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे तक की चर्चा होने लगी थी। सोमवार की बैठक में आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि वे इस्तीफा दे सकते हैं।आरबीआई बोर्ड में 18 सदस्य हैं, वैसे इन सदस्यों की संख्या 21 तक हो सकती है। इनमें रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल और चार डिप्टी गवर्नर पूर्णकालिक आधिकारिक सदस्य हैं। इनके अलावा बाकी 13 सदस्य सरकार नामित करती है। सरकार द्वारा नामित सदस्यों में वित्त मंत्रालय के दो अधिकारी आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार शामिल हैं। साभार:नवजीवन