लोकसभा चुनाव सिर पर आते ही ताबड़तोड़ उद्घाटन-शिलान्यास कर रहे हैं पीएम

लोकसभा चुनाव में अब चंद महीने का वक्त बचा है। लोग सत्तारूढ़ बीजेपी और प्रधानमंत्री से पांच साल का हिसाब मांग रहे हैं। ऐसे में लोगों को रिझाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों धड़ाधड़ उद्घटान और शिलान्यास करने में लगे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों मेट्रो स्टेशनों, फ्लाईओवर और सीवर प्लांट के उद्घाटन में व्यस्त हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री ने दिल्ली मेट्रो की वॉयलेट लाइन के 3.2 किलोमीटर टुकड़े का रिमोट कंट्रोल से उद्घाटन किया। इसके अलावा कोंडली-मनेसर-पलवल एक्स्प्रेसवे के उद्घाटन के साथ ही उन्होंने पलवल में स्थापित देश के पहले श्री विश्वकर्मा स्किल डेवलपमेंट विश्वविद्यालय का शिलान्यास भी रिमोट कंट्रोल से किया। मेट्रो लाइन और एक्सप्रेसवे तो ठीक, लेकिन अब आप सिर खुजाते रह जाइए कि आखिर रिमोट कंट्रोल से शिलान्यास कैसे हो सकता है।ऐसा यह सब शायद इसलिए किया जा रहा है क्योंकि लोकसभा चुनाव सिर पर आ गए हैं और उन्हें पता है कि लोग उनके पांच साल का हिसाब मांगेगे। काम तो ज्यादातर अधूरे पड़े हैं, इसलिए कम से कम शिलान्यास आदि तो कर ही लिए जाएं।

दरअसल प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसी साल जुलाई में सभी मंत्रियों से राज्यवार परियोजनाओं की जानकारी मांगी थी। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पीएमओ ने ऐसे सभी प्रोजेक्ट की फाइल तलब की थी, जो अगले 6 महीने में कम से कम उद्घाटन या फिर शिलान्यास के लिए तैयार हों। आइए नजर डालते हैं ऐसी कुछ परियोजनाओं पर जिनका बीते कुछ महीनों में प्रधानमंत्री ने उद्घाटन किया है।12 नवंबर को प्रधानंमत्री ने वाराणसी में दो सीवर प्लांट का उद्घाटन किया। इन पर ₹425.41 करोड़ की लागत आई है। इसके साथ पीएम ने रामनगर में ₹72.91 करोड़ की एक और परियोजना का शिलान्यास किया।

इसी दिन प्रधानमंत्री ने वाराणसी में दो नेशनल हाईवे, वाराणसी रिंग रोड के पहले फेज और नेशनल हाईवे-56 पर बने बाबतपुर-वाराणसी हाईवे को चार लेन करने के साथ ही अपने निर्वाचन क्षेत्र में वाटरवे प्रोजेक्ट की भी बुनियाद रखी।

इससे पहले 21 अक्टूबर को पीएम ने नई दिल्ली में नेशनल पुलिस मेमोरियल को राष्ट्र को समर्पित कियाय़ साथ ही पुलिस के एक म्यूजियम का भी उद्घाटन किया। यहां 238 टन वजनी और 30 फुट ऊंचे काले ग्रेनाइट स्टोन से बनी एक आकृति भी स्थापित की गई। म्यूजियम में एक दीवार भी बनाई गई है जिसपर देश सेवा करते हुए जान देने वाले 34,800 जवानों के नाम लिखे हैं।

22 सितंबर को पीएम ने ओडिशा में बने दूसरे हवाई अड्डे झारसुगुदा एयरपोर्ट का उद्घाटन और तलछर में एक खाद कारखाने का शिलान्यास किया।जुलाई का महीना पीएम के लिए काफी व्यस्त रहा। उन्होंने दिल्ली से सटे नोएडा में सैमसंग कंपनी की फैक्टरी का उद्घाटन किया। इसके बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के क्षेत्र आजमगढ़ में 340 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्स्प्रेसवे को जनता के लिए खोला। जुलाई में उन्होंने अकेले उत्तर प्रदेश में ही कम से पांच दौरे किए और इस तरह की कई परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया।

जुलाई में ही पीएम ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण – एएसआई के नए मुख्यालय का भी उद्घाटन किया। इस नई इमारत में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।इसी साल जून में पीएम ने रायपुर और जगदलपुर के बीच हवाई सेवा शुरु कराई। ये दोनों जिले छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में हैं। लेकिन उद्घाटन के कुछ समय के अंदर ही जगदलपुर एयरपोर्ट बंद हो गया। अब वहां सिर्फ सुरक्षा गार्ड ही नजर आते हैं।

लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा रही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे की। 841 करोड़ की लागत से इस प्रोजेक्ट का सिर्फ एक हिस्सा ही तैयार हो पाया है। कुल 8.36 किलोमीटर के इस टुकड़े का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री ने साढ़े तीन घंटे का रोड शो किया था। कहा गया कि अब दिल्ली-मेरठ की दूरी सिर्फ घंटे भर में पूरी हो जाएगी, लेकिन इस 8.36 किलोमीटर के हिस्से को पार करते ही वाहन चालकों को जिन दुश्वारियों से दो चार होना पड़ता है, वह सर्वविदित है।
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि पहले फेज का काम रिकॉर्ड 18 महीने में पूरा हो गया। लेकिन प्रधानमंत्री शायद भूल गए कि उन्होंने खुद ही 31 दिसंबर 2015 को यानी पूरे 30 महीने पहले इस एक्सप्रेसवे की बुनियाद रखी थी। इस एक्सप्रेसवे का बाकी काम अभी कहीं अधूरा है तो कहीं शुरु तक नहीं हुआ है। इसके अलावा प्रधानमंत्री जब भी उद्घाटन से फुरसत पाते हैं, तो विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं।