उर्दू शिक्षकों पर निर्णय ले सरकार अन्यथा अवमानना की होगी कार्रवाई: हाईकोर्ट

अखिलेश यादव राज में यूपी में शुरू की गई चार हजार उर्दू टीचर्स की भर्ती प्रक्रिया रद्द किये जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाई है. अदालत ने कहा है कि कोई भी सरकार पिछली सरकार में शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया को बिना किसी ठोस आधार के रद्द नहीं कर सकती है.

हाईकोर्ट ने भर्ती रद्द किये जाने के आदेश को अदालत की अवमानना मानी है और कहा है कि सरकार के ज़िम्मेदार अफसरान इस मामले में छह दिसम्बर को कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखें, नहीं तो उनके खिलाफ अवमानना का चार्ज फ्रेम कर आगे की कार्यवाही की जाएगी.

अदालत के इस फैसले से योगी सरकार को बड़ा झटका लगा है. अदालत ने यह भी कहा है कि भर्ती प्रक्रिया को रद्द किये जाने का आदेश अगर वापस नहीं हुआ तो अवमानना की कार्यवाही होनी तय है. मामले की सुनवाई जस्टिस सुनीत कुमार की सिंगल बेंच में हुई.

गौरतलब है कि साल 2016 में यूपी की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने चार हजार उर्दू टीचर्स की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. सेलेक्शन के बाद काउंसलिंग शुरू होने पर योगी सरकार ने पहले मौखिक आदेश से इन भर्तियों पर रोक लगा दी. मांमला हाईकोर्ट में आया तो अदालत ने भर्ती प्रक्रिया शुरू किये जाने का आदेश दिया.

इसके बाद हाईकोर्ट की ही डिवीजन बेंच ने भी भर्ती शुरू किये जाने का आदेश दिया. योगी सरकार ने अदालत के आदेशों का पालन करने के बजाय इसी साल आठ अक्टूबर को पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द किये जाने का आदेश जारी किया. इस फैसले के खिलाफ मुअल्लिम उर्दू टीचर्स एसोसिएशन ने फिर से हाईकोर्ट में अवमानना की अर्जी दाखिल की है.

प्रदेश में चार हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती निरस्त करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्णय लेने का आदेश दिया है. अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को छह दिसम्बर तक उर्दू शिक्षक भर्ती में निर्णय लेने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि छह दिसम्बर तक निर्णय न लेने पर प्रदेश सरकार के खिलाफ अवमानना की भी कार्रवाई की जायेगी. अपने पिछले आदेश में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को चार हजार उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति करने का आदेश दिया था. लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद भी राज्य सरकार ने आठ अक्टूबर को चार हजार उर्दू शिक्षक भर्ती को निरस्त कर दिया था.