68500 शिक्षक भर्ती: सीबीआई जांच से बचने को दाखिल विशेष अपील पर सरकार को नहीं मिली राहत, अगली सुनवाई 27 को

आज योगी सरकार की ओर से दाखिल विशेष अपील पर सुनवाई हुई। 68500 भर्ती में हुए भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए की जाने वाली सीबीआई जांच को रोकने के लिए मुख्य न्यायाधीश की डबल बेंच में विशेष अपील दाखिल की गई। सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल बहस में मौजूद रहे। एडवोकेट जनरल ने सीबीआई जाँच मामले में कोर्ट से स्टे की मांग की लेकिन कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश में सरकार को कोई राहत नही दी और न ही जांच में कोई स्टे दिया। इस मामले की अगली सुनवाई एकल पीठ की सुनवाई के बाद 27 नवम्बर मुकर्रर कर दी है।

पैरवीकार रिज़वान अंसारी की तरफ से सीनियर वकील मल्होत्रा, उपेंद्र नाथ मिश्रा और अमित भदौरिया ने बहस की।

रिज़वान अंसारी ने बताया कि अब सीबीआई जांच सुनिश्चित है। फ़र्ज़ी वालो की नींद अब जल्द ही खत्म होगी। विदित रहे कि 26 नवम्बर को सीबीआई को अपनी फर्स्ट प्रोग्रेस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करनी है।

उत्तर प्रदेश में 68500 सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले में हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के आदेश के खिलाफ योगी सरकार ने विशेष अपील दाखिल की है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में ये याचिका बुधवार को दाखिल की गई है. याचिका पर आज सुनवाई हुई. याचिका में राज्य सरकार ने पिछली एक नवंबर को दिये गये एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी है.

हाईकोर्ट ने दिए 68500 बेसिक शिक्षक भर्ती की सीबीआई जांच के आदेश

राज्य सरकार ने विशेष अपील कर मांग की है कि एकल पीठ के इस आदेश को निरस्त किया जाए. बता दें प्रदेश में 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले में पिछली एक नवंबर को एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को सीबीआई जांच के आदेश दिये थे. यह आदेश अदालत ने सोनिका देवी व अन्य के मामले में दिये थे.

न्यायालय ने कहा है कि सीबीआई को यह जांच 6 माह में पूरी करनी होगी. न्यायालय ने अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने के मामले में पहले महाधिवक्ता से पूछा था कि राज्य सरकार इस मामले की सीबीआई जांच कराने को तैयार है अथवा नहीं. जिस पर महाधिवक्ता द्वारा सरकार की ओर से सीबीआई जांच से इंकार कर दिया गया था. यह आदेश न्यायमूर्ति इरशाद अली दिया है.

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं के पहले पृष्ठ पर अंकित बार कोड अंदर के पृष्ठों से मेल नहीं खा रहे हैं. न्यायालय ने तब ही इस पर हैरानी जताते हुए कहा था कि उत्तर पुस्तिकाएं बदल दी गई हैं. इस पर महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने मामले की पर्याप्त जांच का भरोसा दिया था.

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फिलहाल कोर्ट के इस फैसले से सरकार से लेकर नवनियुक्त शिक्षकों तक में हड़कंप मंच गया है. वहीं हजारों अभ्यर्थी जो इस भर्ती में जांच की मांग कर रहे थे उनको इस आदेश से बड़ी राहत मिली है. इनका कहना है कि इस भर्ती में कदम-कदम पर बड़ा खेल हुआ जिसकी पोल सीबीआई जांच में खुल जाएगी.
68500 पदों की भर्ती को लेकर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि वह आंखें बंद करके नहीं बैठ सकती. जस्टिस इरशाद अली ने कहा कि परीक्षा परिणाम तैयार करने वाली एजेंसी से लेकर अफसरों तक पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. जो अभ्यर्थी शासन की जांच में योग्य मिले उनको भी अब तक नियुक्ति नहीं मिली. इतना ही नहीं मामला जिस विभाग में गड़बड़ी से जुड़ा था उसी के अधिकारियों को जांच समिति में शामिल किया गया. अफसरों ने पसंद के अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया और योग्य अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं तक फाड़ दी गई. उत्तर पुस्तिकाएं बदलने के बावजूद एजेंसी पर अपराधिक कृत्य के तहत कार्रवाई नहीं की गई. कोर्ट ने इन बातों का हवाला देते हुए सीबीआई जांच के लिए कहा है. कोर्ट ने सीबीआई जांच 6 महीने में पूरी करने के आदेश दिए हैं. इस मामले में अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी जिसमें प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल की जाएगी.