अमित शाह और तीन आईपीएस तुलसीराम प्रजापति एनकाउंटर के मुख्य साजिशकर्ता- जांच अफसर ने कोर्ट में किया दावा

अमित शाह और राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया कथित तौर पर वह राजनेता थे जिन्होंने 2004 में मशूहर बिल्डरों के ऑफिसों में आग लगवाने के लिए सोहराबुद्दीन शेख, तुलसीराम और आजम खान जैसे अपराधियों का इस्तेमाल किया था।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन, राजकुमार पांड्या और डीजी वंजारा कथित तौर पर तुलसीराम प्रजापति के फर्जी एनकाउंटर के मुख्य साजिशकर्ता थे। साल 2006 में गुजरात में हुए इस एनकाउंटर की जांच कर रहे मुख्य जांच अधिकारी ने बुधवार (21 नवंबर, 2018) को स्पेशल कोर्ट में यह दावा किया है। अप्रैल 2012 से केस की जांच कर रहे संदीप तामगड़े ने कोर्ट को यह भी बताया कि यह राजनेताओं और अपराधियों की साठगांठ का परिणाम था। इसमें अमित शाह और राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया कथित तौर पर वह राजनेता थे जिन्होंने 2004 में मशूहर बिल्डरों के ऑफिसों में आग लगवाने के लिए सोहराबुद्दीन शेख, तुलसीराम और आजम खान जैसे अपराधियों का इस्तेमाल किया था। अमित शाह, कटारिया, दिनेश एमएन, राजकुमार पांड्या और वंजारा वह लोग हैं, जिन्हें इस मामले में आरोपी बनाया गया। हालांकि ट्रॉयल कोर्ट ने साल 2014 से 2017 के बीच इस मामले से इन्हें बरी कर दिया।

सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ केस के मुख्य जांच अधिकारी ने गवाही में बड़ी बात कही

सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ केस में मुख्य जांच अधिकारी संदीप तामगड़े ने अदालत में दिए गए अपने बयाम में कहा है कि सोहराबुद्दीन और तुलसी फर्जी मुठभेड़ राजनेता और अपराधियों की साठगांठ का नतीजा था।

सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ केस के मुख्य जांच अधिकारी संदीप तामगड़े ने कोर्ट में दर्ज करवाए गए अपने बयान में बड़ी बात कही है। तामगड़े ने अपने बयान में कहा है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, डीजी वंजारा, राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन सोहराबुद्दीन हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता थे। तामगड़े ने कहा कि सोहराबुद्दीन और तुलसी फर्जी मुठभेड़ राजनेता और अपराधियों की साठगांठ का नतीजा था।

बुधवार को कोर्ट में जांच अधिकारी संदीप तामगड़े ने अपनी जांच में पाए गए तथ्यों को दोहराया। सुबह 11 बजे से शाम साढ़े 7 बजे तक इस मामले की सुनवाई चली। जांच अधिकारी ने यह भी कहा कि जांच में मिले सबूतों के आधार पर ही इन सभी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था।मुख्य जांच अधिकारी संदीप तामगड़े ने बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर कोर्ट में यह भी बताया कि उन्होंने राजस्थान के तत्कालीन गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, मार्बल व्यापारी विमल पाटनी और हैदराबाद के आईपीएस सुब्रमण्यम और एसआई श्रीनिवास राव से पूछताछ कर इनके खिलाफ भी चार्जशीट पेश की थी।
जांच अधिकारी तामगड़े ने एक सवाल के जवाब में कहा कि तब के आरोपी अमित शाह, गुलाबचंद कटारिया और विमल पटनी का बयान उन्होंने खुद लिया था और उस पर हस्ताक्षर भी किए थे। लेकिन जब बचाव पक्ष के वकील ने बयान की कॉपी देखनी चाही तो पता चला कि वह अदालत के रिकॉर्ड में है ही नहीं। जज एसजे शर्मा के पूछने पर सीबीआई ने बताया कि बयान सीबीआई दफ्तर में रखे हैं।

तामगड़े से पहले तत्कालीन सीबीआई एसपी अमिताभ ठाकुर ने भी अपनी गवाही में अमित शाह और दूसरे बड़े पुलिस अधिकारियों को मामले में राजनीतिक और आर्थिक फायदा होने की बात कही थी।