गुजरात में 2654 करोड़ का बैंक फर्जीवाड़ा: कारोबारी की जमानत याचिका से हाईकोर्ट के दो जजों ने खुद को किया अलग

वड़ोदरा के दो कारोबारी भाई अमित और सुमित भटनागर पर 2,654 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड का आरोप है। शुक्रवार को जस्टिस जेपी पार्दीवाला ने निजी कारणों का हवाला देकर जमानत याचिका की सुनवाई से दूरी बना ली। इससे पहले अक्टूबर महीने में दूसरे जज जस्टिस आरपी धोलारिया ने भी दोनों कारोबारियों की जमानत याचिका से खुद को अलग कर लिया था।

सतीष झा

हजारों करोड़ रुपये के बैंक फर्जीवाड़े में आरोपी गुजरात के दो कारोबारी भाइयों का केस फिर से चर्चा में है। गुजरात हाईकोर्ट में लंबित इनकी जमानत याचिका की सुनवाई से दो जजों ने खुद को अलग कर लिया। महज एक महीने के भीतर दोनों जजों ने मामले में सुनवाई से इनकार कर दिया। वड़ोदरा के दो कारोबारी भाई अमित और सुमित भटनागर पर 2,654 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड का आरोप है। शुक्रवार को जस्टिस जेपी पार्दीवाला ने निजी कारणों का हवाला देकर जमानत याचिका की सुनवाई से दूरी बना ली। इससे पहले अक्टूबर महीने में दूसरे जज जस्टिस आरपी धोलारिया ने भी दोनों कारोबारियों की जमानत याचिका से खुद को अलग कर लिया था।

वड़ोदरा के दो कारोबारी भाई अमित भटनागर, सुमित भटनागर और इनके पिता सुरेश भटनागर पर 11 बैंकों से 2,654 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। अमित और सुमित प्राइवेट फर्म ‘डायमंड पावर ट्रांसफर लिमिटेड’ के डायरेक्टर हैं। यह कंपनी वड़ोदरा में ही स्थित है। इससे पहले जस्टिस पार्दिवाला ने मामले में स्वास्थ्य कारणों की वजह से 80 वर्षीय सुरेश भटनागर (अमित और सुमित के पिता) को जमानत दे दी थी। जुलाई महीने में सीबीआई ने केस में जब चार्जशीट दाखिल की तब सुमित भटनागर ने अपनी जमानत की अर्जी जस्टिस पार्दीवाला के समक्ष रखी। चूंकि, सुमित के अलावा उसके भाई अमित भटनागर ने भी जमानत के लिए याचिका दायर की थी। लिहाजा, मामले को कॉर्डिनेट बेंच को सौंप दिया गया। अगस्त महीने में जस्टिस पार्दीवाला ने केस की सुनवाई के दौरान कहा, ” जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान मेरे संज्ञान में आया कि याचिकाकर्ता के भाई, जिनका नाम अमित भटनागर है, वह भी सह-आरोपी हैं। दोनों भाइयों के खिलाफ एक ही आरोप है और दोनों एक ही कंपनी के डायरेक्टर भी हैं। इसलिए याचिका के लिए दूसरे भाई (अमित) के द्वारा दायर याचिका की सुनवाई कॉर्डिनेट बेंच के जरिए की जाएगी।

कॉर्डिनेट बेंच की सुनवाई का जिम्मा जस्टिस धोलारिया के पास था। दोनों मामलों की सुनवाई करते हुए जस्टिस धोलारिया ने 10 अक्टूबर को सुनवाई 19 नवंबर के लिए टाल दी। लेकिन, आरोपियों के वकील ने 29 अक्टूबर को कोर्ट से सुनवाई की तारीख बदलने की मांग की और इसे अदालत ने मान भी लिया। एक दिन बाद 30 अक्टूबर को जस्टिस धोलारिया ने खुद को केस से अलग कर लिया। गौरतलब है कि बैंक से धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने 26 मार्च को कारोबारी भाइयों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया। चार्जशीट में सीबीआई ने कहा कि आरोपियों की कंपनी केबल और इलेक्ट्रिक सामान बनाती है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा डिफाल्टर की श्रेणी में डालने के बावजूद अमित और सुमित भटनागर को टर्म लोन दिए गए।