मोदी सरकार पर बरसे शंकराचार्य स्वरुपानंद, बोले- अयोध्या में धर्म संसद लोगों का ध्यान भटकाने के लिए

वाराणसी में 25 से 27 नवंबर को परम धर्म संसद बुलाई गई है।

वाराणसी में 25 से 25 नवंबर को होगी परम धर्म संसद

चारों मठों के शंकराचार्यों के प्रतिनिधि, 13 अखाड़ों के संत, 99 देशों से धर्म प्रतिनिधि होंगे शामिल

वाराणसी. शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद ने शुक्रवार को केदारघाट विद्यामठ से मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। कहा, अयोध्या में मस्जिद नहीं थी तो अध्यादेश किस बात का। अयोध्या में होने वाली धर्मसभा सिर्फ लोगों का ध्यान भटकाने के लिए है।

दरअसल, 25 से 27 नवंबर तक वाराणसी के सीर गोवर्धन में परम धर्म संसद बुलाई गई है। इस धर्म संसद की कार्यवाही संसद व विधानमंडल की तरह चलेगी। धर्म संसद में चारों मठों के शंकराचार्यों के प्रतिनिधि, 13 अखाड़ों के संत, 99 देशों से धर्म प्रतिनिधि समेत तमाम धर्माचार्य व राजनीतिक दलों के लोग शामिल होंगे।

स्वामी स्वरुपानंद ने इशारों में कहा कि नेता संसद और विधान सभा में तनख्वाह बढ़ाने पर सब एक हो जाते हैं। शराब बेच रहे हैं, अब इनकी नीयत मंदिरों के आभूषणों पर है। मंदिर का पैसा अमेरिका जाएगा, डालर में बदलकर आएगा। देश में रेप की घटनाएं सरकार में बढ़ी हैं। महिलाओं के साथ अनाचार बढ़ा है। पहले दुराचार कर छोड़ देता था, अब तो प्रमाण मिटाने को महिला की हत्या कर दी जाती है।

स्वामी स्वरुपानंद ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान को भी आड़े हाथों लिया। कहा कि, वह कहते हैं मंदिर देवी-देवता के रूप में नहीं, बल्कि आदर्श राम का मंदिर बनाएंगे। इसका मतलब यही निकलता है कि भगवान राम का मंदिर नहीं बनाएंगे। उनको महापुरुष मानते हैं। बल्लभ भाई पटेल ने भारत को एक सूत्र में बांधने का काम किया। उनका 182 मीटर का पुतला बनवाया गया। भगवान राम की प्रतिमा कितनी ऊंची बनेगी। यह नहीं बताया जा रहा है।