झारखंड: 60 साल तक नौकरी कर सकते हैं पारा शिक्षक, कई मांगों पर सरकार है तैयार

रांची: पारा शिक्षकों के आंदोलन से राजनीति के मैदान में संभावित नुकसान को देखते हुए प्रदेश भाजपा के दबाव का असर सरकार पर दिखने लगा है. खुद प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सेवा नियमितीकरण को छोड़कर अन्य मांगों पर कानून सम्मत सहमति के लिए सरकार तैयार हो गई है.

बता दें कि योग्यता के आधार पर अधिकतम 20% तक मानदेय में वृद्धि के अलावा पारा शिक्षक 60 साल तक अपनी सेवा दे सकते हैं. लक्ष्मण गिलुवा ने कहा कि विपक्ष के बहकावे में न आकर पारा शिक्षक जल्द से जल्द काम पर लौटें और प्रतिनिधिमंडल के जरिए सरकार से वार्ता भी करें.

आरक्षण का प्रावधान

लक्ष्मण गिलुवा ने पारा शिक्षकों की सेवा नियमित नहीं किए जाने के पीछे कई तर्क पेश किए. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने साल 2017 में पारा शिक्षकों यानी शिक्षा मित्रों को वेतनमान दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को निरस्त कर दिया. लक्ष्मण गिलुवा ने कहा कि झारखंड को छोड़कर हर राज्य में पारा शिक्षकों की नियुक्ति में आरक्षण का प्रावधान किया गया है.

छत्तीसगढ़ की नियुक्ति प्रक्रिया
पारा शिक्षकों की मांग है कि छत्तीसगढ़ की तर्ज पर उनकी नियुक्ति को नियमित किया जाए. इसके जवाब में लक्ष्मण दिलवा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सरकार दो तरह से शिक्षकों की नियुक्ति करती है, पहली नियुक्ति सरकार सीधे करती है, जबकि दूसरी नियुक्ति पारा शिक्षकों की होती है जो पंचायत स्तर पर होती है.

आरक्षण का पालन होता है इसके लिए भी नियमित नियुक्ति की तरह विज्ञापन निकाला जाता है. नियमित नियुक्ति की तरह पारा शिक्षकों की नियुक्ति में भी आरक्षण का पालन होता है. छत्तीसगढ़ में पारा शिक्षक में नियुक्त होने के लिए न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट है, जबकि झारखंड में दसवीं है.

जेल में बंद पारा शिक्षकों पर भी नरम रुख

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा से पूछा गया कि जब पारा शिक्षकों के तमाम बड़े नेता जेल में बंद हैं, ऐसी सूरत में किससे बात करेगी सरकार. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पारा शिक्षकों के ओर से कोई भी प्रतिनिधिमंडल आकर इस मसले पर बात कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान जेल में बंद पारा शिक्षकों के मसले पर भी बात हो सकती है.

झारखंड में पारा शिक्षकों को मिलते हैं कई सुविधाएं
झारखंड एकलौता राज्य है जहां शिक्षक नियुक्ति में पारा शिक्षकों को 50% का आरक्षण दिया गया है.
झारखंड में अब तक करीब 10012 शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से नियमित हो चुके हैं.

शिक्षकों को पांच करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ किया गया है.
आकस्मिक और मातृत्व अवकाश किसी भी राज्य से झारखंड में अधिक है

पारा शिक्षकों के मामले में पार्टी के आगे झुकी सरकार! गिलुआ ने की काम पर लौटने की अपील

पारा शिक्षकों के मामले में सरकार के बैक फुट पर आने के संकेत मिल रहे हैं. मंत्री विधायक और पार्टी नेताओं के दवाब में सरकार को झुकना पड़ रहा है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने इस बात के संकेत दिए है
लक्ष्मण गिलुआ ने कहा कि सरकार ने पारा शिक्षकों की अधिकतर मांगें मान ली है. अगर पारा शिक्षक काम पर लौटते हैं तो बातचीत कर बाकी मांगों पर भी विचार किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पारा शिक्षकों को नियनित नहीं किया जा सकता है. इसके लिए उन्होंने यूपी सरकार के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक का हवाल दिया.

क्या सरकार पारा शिक्षकों की बर्खास्तगी की प्रक्रिया रोकेगी इस सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके काम पर लौटते ही वैकल्पिक नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी जाएगी. लक्ष्मण गिलुवा ने यहां तक कहा कि पारा शिक्षकों का दल जब बातचीत करने आएगा तो जेल में बंद पारा शिक्षकों के मामले पर भी चर्चा के लिए सरकार तैयार है.