68500 शिक्षक भर्ती: ज़िला आवंटन में हुई अनियमितता पर हाईकोर्ट गंभीर, दोनो चयन सूचियां रद्द कर नए सिरे से जारी हो सकती है मेरिट, 22 हज़ार शिक्षकों के प्रभावित होने की आशंका

सूबे के परिषदीय स्कूलों की 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित अभ्यर्थी जिला आवंटन को लेकर लगातार गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि लिखित परीक्षा के अंको को दरकिनार करते हुए कम अंक वालों को उनकी पसंद को जिला आवंटित किया गया. अधिक अंक करने के बाद भी दूर के जिलों में अभ्यर्थियों को भेजा गया है. ये मामला हाई कोर्ट पहुच गया है। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस पर गंभीर रुख अख्तियार किया है।

इलाहाबाद हाइकोर्ट 68500 में दो चरणों में किये गए जिला आवंटन को कोर्ट गलत मानते हुए राज्य सरकार को 68500 पदों के सापेक्ष नए सिरे से आवंटन किये जाने का आदेश जारी कर सकता है।

कल हुई सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट से प्रथम व् द्वितीय सूची के प्रभावित लोगों को पार्टी न बनाये जाने के कारण उनका पक्ष बिना सुने मामले का निस्तारण न करने का निवेदन किया। जिसे स्वीकार करते हुए सचिव को एक पब्लिक नोटिस जारी कर इस केस की सूचना देने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा जो भी मामले में अपना पक्ष रखना चाहे वो 10 दिसंबर तक अपनी याचिका दाखिल कर सकता है। कोर्ट ने इस आशय की सूचना सरकार 5 दिन के अंदर समाचार पत्र के माध्यम से दे।

यदि 10 दिसंबर की अंतिम सुनवाई में कोर्ट संतुष्ट हुआ तो अब जिला आवंटन पूर्व की दोनों सूचियों को रद्द कर 68500 के सापेक्ष नए सिरे से अभ्यर्थियों की मेरिट के अनुसार जिला आवंटन किया जायेगा तथा नए विद्यालय/ नए जिले में 1 अप्रैल ( नए सत्र ) से ज्वाइन करना होगा ।
प्रभावित शिक्षक 10 दिसम्बर तक अपना पक्ष रख सकते है । मामले का निस्तारण दस दिसम्बर को होगा।

कोर्ट में लड़ रहे नवनियुक्त शिक्षकों का आरोप है कि अभ्यर्थियों को जिलों के आवंटन में अनियमितता हुई है। कम नंबर वाले अभ्यर्थियों को उनकी सुविधा के अनुसार जबकि अधिक नंबर पाने वालों को दूर का जिला दिया गया है। जो कि जिला आवंटन की प्रक्रिया के खिलाफ है।

दूर दराज जिलों में भेजे गए कई चयनित अभ्यर्थी इस मामले में कोर्ट जा चुके हैं और प्रक्रिया को चुनौती दी है. हालांकि अधिकारियों की माने तो जिला आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है. पूरी समस्या दो चयन सूची बनने से खड़ी हुई है. वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि जब शासनादेश में 68500 पदों की भर्ती हो रही थी तो चयन मानक कम क्यों किया गया, जिससे दूसरी सूची जारी करना पड़ा. इसमें उनका दोष नहीं है, बल्कि जिन अफसरों ने इसे किया है, उनकी जवाबदेही बनती है.
अभ्यर्थियों का कहना है कि जिलों के दोषपूर्ण आवंटन से करीब 22 हजार शिक्षक प्रभावित हैं। इस संबंध में कोर्ट ने विभाग को गलती सुधारने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया है।