सबरीमाला में चुनाव हारी बीजेपी, मुस्लिमों की पार्टी को हुआ फायदा

सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाली भाजपा को उम्मीद के अनुरूप इसका राजनीतिक लाभ नहीं मिला और वह मात्र दो सीटें ही जीत पाई।

जनसत्ता ऑनलाइन के मुताबिक केरल में सत्ताधारी माकपा नीत एलडीएफ ने स्थानीय निकाय उपचुनाव में शुक्रवार (30 नवंबर, 2018) को 39 सीटों में से 21 सीटें जीत ली। इस जीत से पार्टी ने साबित कर दिया कि सबरीमला विवाद का उसके वोट बैंक पर असर नहीं पड़ा। चुनाव से पहले भी एलडीएफ के खाते में 21 सीटें थी। चुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ 12 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही है। सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाली भाजपा को उम्मीद के अनुरूप इसका राजनीतिक लाभ नहीं मिला और वह मात्र दो सीटें ही जीत पाई। उपचुनाव पूर्व राज्य की सत्ता पर काबिज सीपीएम लीड एलडीएफ ने सीएम पिनाराई विजयन के प्रति लोगों को आकर्षित करने में खासी मेहनत की। वहीं कांग्रेस लीड यूडीएफ ने और भाजपा ने मंदिर विवाद पर हिंदू भावनाओं को भुनाने की खूब कोशिश की थी।

उपचुनाव में भाजपा ने अलपुज्जा जिले में पंचायत वार्ड की दो सीटें जीतीं। हालांकि पड़ोसी जिले पथानामथिट्टा, जहां सबरीमला मंदिर हैं, वहां पार्टी को उम्मीद के मुताबिक लाभ नहीं मिला। पंडालम नगर पालिका में भी, जहां सबरीमला मंदिर विरोध-प्रदर्शन का केंद्र रहा, भाजपा की हार हुई। यहां कडक्कड़ डिवीजन में भाजपा उम्मीदवार को महज 12 वोट मिले। खास बात यह है कि मुस्लिम ग्रुप की एनडीएफ लीड एसडीपीआई को कडक्कड़ डिवीजन जीतने में कामयाब रही।

चुनाव में 11 वार्ड जीतने वाली कांग्रेस लीड यूडीएफ को पांच सीटें का नुकसान हुआ है। चुनाव पूर्व पार्टी के पास 16 सीटें थीं। चुनाव में एसडीपीआई ने कुल दो सीटें जीती हैं। पहले पार्टी का एक सीट पर कब्जा था। तीन आजाद उम्मीदवार भी चुनाव में जीते हैं। एलडीएफ ने चुनाव परिणाम का जश्न मनाया है। जबकि चुनवा में भाजपा और एसडीपीआई का वोट बैंक कुछ हद तक बड़ा है।