सीएम योगी ने कहा, दलित है हनुमान तो आगरा के बाद लखनऊ में दलित संगठनों ने हनुमान मंदिर पर किया कब्जा

आगरा के बाद लखनऊ में दलित संगठनों ने हनुमान मंदिर पर किया कब्जा

सीएम योगी द्वारा राम भक्त हनुमान को दलित बताए जाने के बाद अब दलित संगठनों ने मंदिरों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। आगरा के बाद शनिवार को लखनऊ में भी दलितों ने दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर पर पूजा-अर्चना की और हनुमान चालीसा का पाठ किया।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने बीते दिनों बजरंग बली हनुमान को ‘दलित’ बताया था, जिसके बाद अब हनुमान मंदिरों पर अधिकार को लेकर नई जंग छिड़ गई है। राम भक्त हनुमान को दलित और वंचित बताने पर सीएम योगी को राजस्थान सर्व ब्राह्मण महासभा ने 28 नवंबर को नोटिस भेज कर माफी मांगने की मांग की थी। अब लखनऊ के हनुमान मंदिर में दलित समाज के लोगों ने अपना हक जताना शुरू कर दिया है।

खबरों के मुताबिक, लखनऊ के हजरतगंज में मौजूद दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर पर दलितों ने पूजा-अर्चना की और हनुमान चालीसा का पाठ किया। हनुमान मंदिर पहुंचे कई दलितों के हाथों में तख्तियां मौजूद थी, जिस पर लिखा हुआ था, दलितों के देवता बजरंग बली का मंदिर हमारा है। तख्ती लेकर पहुंचे इंद्रजीत ने कहा कि दलितों के देवता बजरंग बली का मंदिर हमारा है। वहीं दलित सेवा उत्थान समिति से जुड़े विजय बहादुर ने कहा, “जब सीएम योगी खुद कह चुके हैं कि बजरंगबली दलित समाज के थे तो मंदिर पर दलित पुजारी की नियुक्ति होनी चाहिए।”

इससे पहले शुक्रवार को आगरा में दलित समुदाय के लोगों ने जनेऊ धारण कर मंदिर में हनुमान चालीसा पढ़ी। साथ ही इन लोगों ने दलित को मंदिर का पुजारी बनाने की मांग की। आगरा के प्रदर्शनकारी दलितों ने कहा था कि सीएम योगी ने उनकी आंखें खोल दी और हनुमान जी हमारी जाति के हैं। इन लोगों ने पूरे भारत के हनुमान मंदिर पर दावा ठोकने की बात कही।

गौरतलब है कि अलवर जिले के मालाखेड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को दलित, वनवासी, गिरवासी और वंचित करार दिया था। उन्होंने कहा कि बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिर वासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं।इसे भी पढ़ें: योगी ने बजरंग बली को बताया दलित, गुस्साए ब्राह्मणों ने थमा दिया नोटिस, कहा माफी मांगे, नहीं तो मुकदमामोदी के मंत्री ने सीएम योगी के दावे को बताया झूठा, कहा- हनुमान जी दलित नहीं, आर्य थे

साभार: नवजीवन